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17 जनवरी 2011

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटीःअब तक अपलोड नहीं हुए एग्जामिनेशन फॉर्म

चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (सीसीएस) के ग्रैजुएशन के रेग्युलर व प्राइवेट के फॉर्म अब तक वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए गए हैं। इससे डिग्री कॉलेज प्रशासन काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि कब फॉर्र्म आएंगे, क्योंकि फॉर्म भरने का समय काफी बीत गया है। पिछले वर्ष 15 जनवरी तक प्राइवेट फॉर्म भरे जा चुके थे। वहीं कॉलेजों ने कुछ विषयों में प्राइवेट फॉर्म भरने की लिमिट तय करने का अनुरोध किया है, ताकि किसी एक ही विषय में छात्रों की संख्या ज्यादा न हो जाए।

सीसीएस यूनिवर्सिटी की इस लेटलतीफी से इन दिनों कॉलेज प्रशासन और स्टूडेंट्स परेशान हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से अभी तक केवल प्रफेशनल कोर्स व पीजी कोर्स के ही एग्जामिनेशन फॉर्म भरे गए हैं। ग्रैजुएशन कोर्स, जिसमें सबसे अधिक स्टूडेंट्स की संख्या होती है, पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हालत यह है कि जनवरी का आधा महीना बीत चुका है पर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से अभी तक यह नहीं बताया जा रहा कि आखिर फॉर्म कब तक आएंगे। जब तक फॉर्म भरे नहीं जाते तब तक स्टूडेंट्स परेशान होकर कॉलेजों के चक्कर लगाते रहंेंगे। वहीं एग्जाम फॉर्म अपलोड होने से लेकर उसे कॉलेज में जमा करने तक करीब 30 दिन से ज्यादा का समय लगेगा। ऐसे में यूनिवर्सिटी के मेन एग्जाम मार्च तक हो पाएंगे यह कहना भी मुश्किल है। कॉलेज सूत्रों के मुताबिक यूनिवर्सिटी की ओर से कॉलेजों से कुछ सूचना मांगी गई है। जैसे उनके यहां कौन-कौन से कोर्स है और उसमें स्टूडेंट्स की संख्या कितनी है। इससे लगता है कि यूनिवर्सिटी यह तय करेगी कि फॉर्म कैसे जारी किए जाएं। 
एमएमएच कॉलेज के एग्जाम कोआर्डिनेटर डॉ ए. के. जैन ने बताया कि प्राइवेट स्टूडेंट्स के लिए कॉलेज की ओर से यह अनुरोध किया गया है कि सब्जेक्ट वाइज स्टूडेंट्स की संख्या को निर्धारित किया जाए। क्योंकि स्टूडेंट्स अकसर यह करते है कि किसी एक सब्जेक्ट पर ज्यादा जोर देते हुए केवल उसी को ही भरते है। इससे काफी परेशानी होती है। एक सब्जेक्ट में स्टूडेंट्स की भीड़ बढ़ जाती है, जबकि अन्य सब्जेक्ट में स्टूडेंट्स करीब-करीब न के बराबर होते है। उन्होंने बताया कि इस असंतुलन से एग्जाम कंडक्ट कराने में भी काफी दिक्कतें पेश आती है। यदि यूनिवर्सिटी अपनी वेबसाइट पर प्राइवेट स्टूडेंट्स के लिए सब्जेक्ट वाइज स्टूडेंट्स की संख्या निर्धारित करती है तो कॉलेज प्रशासन को काफी सहूलियत रहेगी। 
(नवभारत टाइम्स,गाजियाबाद,17.1.11)

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