राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत लेक्चरर और रीडर के पदनाम बदलेंगे। रीडर का पदनाम बदलकर एसोसिएट प्रोफेसर और लेक्चरर का एसिस्टेंट प्रोफेसर हो जाएगा। इन पदनामों को बदलने को उप्र राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 में संशोधन करना होगा। अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूर कराने की कवायद भी शुरू हो गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सचिव ने 31 दिसंबर 2008 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि राज्यों द्वारा विश्वविद्यालयों व कालेजों के शिक्षकों को पहली जनवरी 2006 से 31 मार्च 2010 तक छठा वेतनमान देने के कारण पड़ने वाले व्ययभार का 80 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करेगी। केंद्र सरकार राज्यों को यह धनराशि तभी देगी जब वे कुछ शर्तें पूरी करेंगे। इनमें से एक शर्त यह थी कि विश्वविद्यालय और कालेजों में रीडर का पदनाम एसोसिएट प्रोफेसर व लेक्चरर का एसिस्टेंट प्रोफेसर होगा। प्रदेश सरकार ने 28 फरवरी 2009 को शासनादेश जारी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों के शिक्षकों को छठा वेतनमान देने का शासनादेश जारी किया था। राज्य सरकार ने 16 जून 2010 को मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर शिक्षकों को पहली जनवरी 2006 से 31 मार्च 2010 तक छठे वेतनमान देने के कारण हुए खर्च की 80 फीसदी धनराशि के तौर पर 855.98 करोड़ रुपये की मांग की थी। इस पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पूछा था कि छठे वेतनमान के संबंध में उसने जो शर्तें तय की थीं, राज्य ने उन्हें पूरा किया है या नहीं। इसलिए शासन पदनामों को बदलने की कवायद में जुट गया है। पदनाम बदलने के बारे में उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। प्रस्ताव को कैबिनेट से अनुमोदित कराने के लिए उसे विभिन्न विभागों से मंजूरी दिलाने की कवायद चल रही है(दैनिक जागरण,लखनऊ,17.1.11)।
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