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29 जनवरी 2011

मध्यप्रदेशःबीई और बी.फार्मा में लैटरल एंट्री में अब सीधे प्रवेश

बीई और बीफार्मा के लिए लेटरल एंट्री परीक्षा अंतत: खत्म हो ही गई। डिप्लोमा और बीएससी के बाद बीई और बीफार्मा में अब सीधे प्रवेश दिए जाएंगे। छात्र-छात्राओं को न तो व्यावसायिक परीक्षा मंडल की प्रवेश परीक्षा देना होगी और न काउंसलिंग में शामिल होने की जरूरत होगी। मेरिट के आधार पर कालेज खुद ही प्रवेश दे सकेंगे। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने लेटरल एंट्री से प्रवेश परीक्षा के बंधन हटा दिया है। नए नियमों में किए गए आमूलचूल बदलावों में लेटरल एंट्री को प्रवेश परीक्षा से मुक्त कर दिया है। अब सीधे मेरिट के आधार पर ही सेकंड ईयर में प्रवेश दिए जाएंगे। यह बदलाव अगले सत्र से ही लागू हो जाएंगे। प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था खत्म करने के साथ ही कई अन्य बदलाव भी किए गए हैं। इनके तहत अब लेटरल एंट्री में प्रवेश का मुख्य आधार डिप्लोमा पाठ्यक्रम होगा। डिप्लोमाधारी छात्र न मिलने पर ही कालेज बीएससी के अंकों के आधार पर प्रवेश दे सकेंगे। अभी तक सभी कालेजों में डिप्लोमा और बीएससी के लिए 70 और 30 का अनुपात रखा जाताथा। इसके चलते डिप्लोमाधारी न मिलने पर अधिकांश सीटों पर बीएससी के अंकों पर ही प्रवेश दे दिए जाते थे। कोटा भी हुआ दोगुना प्रवेश परीक्षा हटाने के साथ ही एआईसीटीई ने सभी कालेजों में लेटरल एंट्री की सीटों की संख्या भी दोगुना कर दी हैं। अभी तक सभी कालेजों में कुल सीटों की दस प्रतिशत सीटें लेटरल एंट्री की होती थीं। अब हर कालेज में टोटल इनटेक के बीस प्रतिशत के बराबर सीटें लेटरल एंट्री के लिए उपलब्ध रहेंगी। मप्र ने छेड़ी थी मुहिम लेटरल एंट्री के जरिए सीधे सेकंड ईयर (तीसरे सेमेस्टर) में प्रवेश मिलने के बाद भी प्रदेश के छात्र-छात्राओं में इसके प्रति रुझान नहीं है। लगातार घटती संख्या को देखते हुए तकनीकी शिक्षा विभाग ने पिछले साल प्रवेश परीक्षा खत्म करने का निर्णय लिया था। इसके लिए एआईसीटीई की अनुमति के लिए प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन एआईसीटीई ने अनुमति देने से इंकार कर दिया। इसके चलते विभाग को मजबूरी में प्रवेश परीक्षा कराना पड़ी थी। हालांकि पिछले साल भी बमुश्किल बीस फीसदी सीटें ही भर सकीं। स्थिति को देखते हुए एआईसीटीई ने इस बार परीक्षा का बंधन हटा लिया। फायदेमंद होगा बदलाव राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूष त्रिवेदी का कहना है कि प्रवेश परीक्षा का बंधन हटना विद्यार्थियों के अलावा कालेज प्रबंधन, विभाग और विवि सभी के लिए फायदेमंद हो सकेगा। इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता पर भी इसका अच्छा असर होगा। छात्रों का पैसा और समय बचेगा तो कालेज भी समय पर सत्र शुरू कर सकेंगे। इससे परीक्षाएं भी समय पर हो सकेंगी(दैनिक जागरण,भोपाल,29.1.11)।

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