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17 जनवरी 2011

कंपनियों में बढ़ी कामकाजी महिलाओं की माँग

अर्थव्यवस्था की गति तेज में महिलाओं को योगदान भी पुरुषों से कम नहीं रहा है। अपने कार्य के प्रति ज्यादा समर्पित हैं। इसी को देखते हुए महिलाओं के लिए उज्ज्वल रोजगार संभावनाएं पैदा हो रही हैं। एक सर्वे के मुताबिक, ५६ प्रतिशत भारतीय कंपनियां २०११ में कामकाजी महिलाओं को भर्ती करने की इच्छुक है। वर्कप्लेस सोल्यूशंस प्रोवाइडर रेगस द्वारा किए गए सर्वे के नतीजे बताते है कि भारतीय फर्मों द्वारा अपने प्रतिपक्ष वैश्विक कंपनियों के मुकाबले कामकाजी महिलाओं की भर्ती अधिक करने की संभावना है। रेगस सर्वे जिसमें विश्वभर के १०००० कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों का अगस्त और सितंबर २०१० के दौरान साक्षात्कार किए गए और इससे पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर ३६ प्रतिशत कंपनियां २०११ में कामकाजी महिलाओं की भर्ती करना चाहती है। यह कामकाजी महिलाओं की भर्ती में गिरावट का रुझान दर्शाता है। इसी रिसर्च से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर ४४ प्रतिशत कंपनियों ने वापसी करने वाली महिलाओं की भर्ती करने की इच्छा जताई हैं।

भारत में ४३ प्रतिशत कंपनियों की योजना कर्मचारियों को बढ़ाने की है, जबकि ५६ प्रतिशत विदेशी फर्मों ने घोषणा की है कि उनकी योजना अधिक कामकाजी महिलाओं की भर्ती करने की है। यह आंकड़ा एक वर्ष पहले के ६४ प्रतिशत के मुकाबले में कमी आने का संकेत देता है। वैश्विक स्तर पर कामकाजी महिलाओं की भर्ती करने के रुझान के एक अध्ययन से पता चलता है कि अल्पसंख्यक नियोक्ताओं के बीच कुछ चिंताएं दिखी, जो अभी भी चिंतित हैं कि कामकाजी महिलाएं अन्य कर्मचारियों (३७ प्रतिशत) के मुकाबले कम प्रतिबद्धता और लचीलता दिखा सकती है। प्रशिक्षण के बाद दूसरे बच्चे के लिए (३३ प्रतिशत) जल्दी छोड़ देती है या उनके पास पुरानी निपुणता (२४ प्रतिशत) है। भारत में नियोक्ता खासकर कामकाजी महिलाओं की पुरानी निपुणता (४५ प्रतिशत) होने और दूसरे बच्चे के लिए (५१ प्रतिशत) उनकी छुट्टी को लेकर चिंतित है।

सकारात्मक पक्ष में बहुतायत में कंपनियां अब महिलाओं की भर्ती करने पर महत्व देने लगी हैं। ७२ प्रतिशत ने घोषणा की है कि उनका मानना है कि अंशकालिक वापसी करने वाली महिलाओं की उपेक्षा करना रोजगार पूल के महत्वपूर्ण और मूल्यवान हिस्से को खोना है। इसके अलावा ५६ प्रतिशत कामकाजी महिलाएं जो निपुणता ऑफर करती है, उनको मौजूदा बाजार में पाना कठिन है तथा ५७ प्रतिशत ने घोषणा की है कि वे वापसी करने वाली महिलाओं को मूल्यवान मानते है, क्योंकि वे अधिक वेतन की मांग किए बिना अनुभव और कौश्ल ऑफर करती है। भारत में इस कारण से कामकाजी महिलाओं को महत्व देने वालों की संख्या वैश्विक स्तर (६४ प्रतिशत) से अधिक है। शायद इस बात का संकेत दे रहा है कि कामकाजी महिलाएं और उनके सहकर्मी के बीच समान वेतन तक पहुंचने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है। रेगस-इंडिया के कंट्री प्रमुख मधूसूदन ठाकुर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वैश्विक संदर्भ में, यह आश्चर्यजनक नहीं है कि कठोर अर्थव्यवस्था के कारण बरताव में पूर्वाग्रहित रुख वापस आए है और कुछ बिजनेस समकालीन कामकाजी वातावरण के लिए पुराने फैशन को अमल मे लाने के लिए अभी दोषी है। इन मूल्यवान एसेट को समेकित करने के लिए कुछ सैवी बिजनेस लचीले कार्य व्यवस्था को अमल में ला रहे है और परिवारजन अनुकूलता प्रदान कर रहे है तथा ठीक उसी समय कामकाज के वैकल्पिक घंटे अथवा घर के निकट कर्मचारी को कार्य करने की अनुमति देकर अधिक उत्पादकीय व सरल कार्य वातावरण पेश किए है। इसे मानते हुए कि कामकाजी महिलाओं की जरूरत अपरिहार्य नहीं है और उनको सभी कार्यबल जैसा मानकर उत्पादकता प्रदान करेंगे तथा मदों मे कमी के लाभ के साथ कर्मचारियों को अधिक प्रेरणा देंगे। वहीं, महिलाएं केवल रोजगार प्राप्त करने में ही नहीं बल्कि खुद का काम करने में भी आगे निकल रही हैं।

इंडियन डायरेक्ट सेलिंग एसोसिएशन (आईडीएसए) द्वारा एर्नेस्ट एंड यंग के सहयोग से हाल ही कराए गए एक अध्ययन के मुताबिक, डायरेक्ट सेलिंग सेक्टर के एक प्रमुख सकारात्मक प्रभाव के रूप में उद्योग में फिलहाल भाग ले रहे इंडिपेंडेंट सेल्स कंसलटेंट्स (आईएससी) की संख्या में काफी वृद्धि दिखाई दे रही है। पूरे भारत में डायरेक्ट सेलिंग की गतिविधियों में ३० लाख से अधिक व्यक्ति शामिल हैं जबकि गत वर्ष इनकी संख्या १८ लाख थी। इस वर्ष आईएससी महिलाओं की संख्या २१ लाख है, जो गत वर्ष से १२ लाख अधिक है, जो यह दर्शाता है कि डायरेक्ट सेलिंग की महिला सशक्तिकरण में कितनी सशक्त भूमिका है। डायरेक्ट सेलर्स स्वतंत्र सेल्स कंसल्टेंट्स होते हैं। वे अपने खुद ही बॉस होते हैं। इसका अर्थ हुआ कि वे पार्टटाइम काम कर सकते हैं। वे चुन सकते हैं कि उन्हें कितना और कब काम करना चाहते है। अपना लक्ष्य स्वयं निर्धारित कर सकते हैं और यह भी खुद ही तय कर सकते हैं कि उन्हें वे लक्ष्य किस प्रकार हासिल करने हैं। वे अपने प्रयासों के हिसाब से कमाई कर सकते हैं। कोई भी कठिन काम करने की अपनी इच्छा के अनुरूप सफलता हासिल कर सकता है। बहुत कम या फिर बिना कोई धन निवेश किए आपका अपना कारोबार हो सकता है। आईडीएसए द्वारा कराए गए अध्ययन के मुताबिक डायरेक्ट सेलिंग उद्योग की अगले तीन वित्तीय वर्षों की वार्षिक विकास दर २० फीसदी से अधिक होने की उम्मीद है ताकि २०११-१२ के दौरान ७१,२०० मिलियन रुपए का कारोबार अर्जित कर सके। विकास की ओर अग्रसर होने के लिए उद्योग को अपनी बिक्री करने वालों की ताकत को बढ़ाना होगा, इसलिए भारत में डायरेक्ट सेलिंग उद्योग की विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं।भारत में ४३ प्रतिशत कंपनियों की योजना कर्मचारियों को बढ़ाने की है, जबकि ५६ प्रतिशत विदेशी फर्मों ने घोषणा की है कि उनकी योजना अधिक कामकाजी महिलाओं की भर्ती करने की है। यह आंकड़ा एक वर्ष पहले के ६४ प्रतिशत के मुकाबले में कमी आने का संकेत देता है(आशुतोष वर्मा,नई दुनिया,दिल्ली,17.1.11)।

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