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17 जनवरी 2011

मुजफ्फरपुरःमैट्रिक पास कर्मी लेता है बीएससी की क्लास

बिहार सरकार राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने और शिक्षकों की कमी को पूरा करने के कितने ही दावे करे,हकीकत यह है कि बाबा साहब भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय में मैट्रिक पास अस्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बीएससी के छात्रों की क्लास ले रहा है। विश्वविद्यालय परिसर में ही स्थित लंगट सिंह कालेज के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग में प्रयोगशाला प्रदर्शक के रूप में कार्यरत अनिल कुमार ठाकुर विज्ञान के स्नातकों की क्लास लेते हैं। मुजफ्फरपुर के कुढ़नी थानाक्षेत्र के खरौना डीह गांव निवासी अनिल ने 1985 में एलएस कालेज में अस्थाई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नौकरी शुरू की। इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई शुरू होने पर उन्हें महज 10 रुपये रोज पर प्रयोगशाला वाहक के रूप में रखा गया। बाद में इंस्ट्रक्टर के अभाव में उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें प्रयोगशाला में पढ़ाने के लिए भी भेजा जाने लगा। 1990 में पारिश्रमिक बढ़ाकर 12 रुपये कर दिया गया। 2002 के बाद विवि के सिंडिकेट की बैठक में उनके लिए 2000 रुपये प्रति महीने तय कर दिया गया, जो आज तक उन्हें हासिल हो रहा है। समय के साथ-साथ स्नातक विज्ञान के छात्रों को पढ़ाने में तो दक्ष हो गई, पर नौकरी के मायने में वह अस्थायी चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ही रह गई। इस दौरान उससे ज्ञान हासिल करने वाले कितने छात्र क्या से क्या हो गए। एकाध तो प्राचार्य तक बन गए। दिलचस्प यह भी है कि इस प्रतिभा के साथ जिन लोगों ने दैनिक कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया, उनकी सेवा कब की नियमित हो गई। एलएस कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार का कहना है कि अनिल कुमार ठाकुर बेहद प्रतिभावान व्यक्ति हैं। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से चीजें सीखी हैं और इसका लाभ छात्रों को मिलता रहा है(सुजीत कुमार पप्पू,दैनिक जागरण,मुजफ्फरपुर,17.1.11)।

1 टिप्पणी:

  1. शुरु में तो लगा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। यह भ्रम शीर्षक से ही उतपन्न हुआ।
    एक संस्मरण याद आ गया। हमारे ज़माने में ज़ूऑल्जी लैब में फूदन हुआ करता था। किसी भी डिमॉन्स्ट्रेटर से बढिया तरीक़े से वह हमें डिसेक्षन करना सिखा देता था। चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी था, और शाय्द ही मैट्रिक पास रहा होगा। फोद्दन के योगदान को हम आज भी नहीं भूल पाएं हैं। शायद कभी नहीं।

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