भारतीय प्रौद्यौगिकीसंस्थानों (आईआईटी) में भविष्य में पढ़ाई महंगी होसकती है। इन्हें आईआईएम की तर्ज पर आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हो रहे प्रयासों के तहत इनमें फीस बढ़ाए जाने के आसार हैं। परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने इन संस्थानों को आर्थिक रूपसे आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई और उपायों के साथ-साथ फीस बढ़ाने का विकल्प भी दिया है। समिति द्वारा संस्थानों के लिए तैयार किए गए विजन पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने 21 जनवरी को आईआईटी काउंसिल की बैठक बुलाई है। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य एजेंडा है कि कैसे आईआईटी अपने लिए आर्थिक संसाधन जुटाएं। इस दिशा में काकोडकर समिति की सिफारिशों पर चर्चा की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इनसिफारिशों में कई सुझाव हैं। धन जुटाने के लिए आईआईटीउद्योग जगत के साथ मिलक रकार्य करें। पूर्व छात्रों से चंदा हासिल करें तथा फीस में तर्क संगत इजाफा करें। दरअसल, आईआईटी में अभी सालाना फीस करीब 50 हजार रुपये है।एकदशक से इसमें कोई बदलाव नहीं कि या गया है। समिति का तर्क है कि जब आर्थिक रूपसे कमजोर छात्रों के लिए सरकारने सब्सिडीयुक्त शिक्षा ऋण का प्रावधान किया है तो इसमें थोड़ी बढ़ोतरी की जा सकती है।
कवायद
■ आईआईटीकाउंसिल में 21 जनवरी कोहोगी फीस वृद्धि पर चर्चा
■ प्रवेश परीक्षा में बदलाव को लेकर भी हो सकता है अहम फैसला
(हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)
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