देश में शिक्षकों की भारी कमी के चलते कें द्र सरकारने फिलहाल बीएड कोर्स को दो साल का करने का फै सला टाल दिया है। अलबत्ता पत्राचार से चलने वाले सभी बीएड कोर्स दो साल के होंगे। अभी कुछ विवि पत्राचार से एक साल का भी कोर्स चला रहेहैं।नए आदेश जारी होने के बाद एक साल के पत्राचार कोर्स की अहमियत खत्म होजाएगी। शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद देश में करीब 12 लाख शिक्षकों की कमी दर्ज की गई है।इसके अलावा सेवानिवृत्ति आदि के चलते भी हर साल चार-पांच लाख नए शिक्षकों की जरूरत होती है। पूर्व में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने जो फ्रेमवर्क तैयार कर मंत्रालय कोसौंपा था उसमें बीएड के कोर्स कोविस्तार देते हुए एक साल से बढ़ाकर दो साल करने की सिफारिश की थी। लेकि न अब सरकारमहसूस कर रही है कि यदि बीएड कोर्स दो साल का कि या गया तो आने वाले समय में शिक्षक तैयार करने की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी और शिक्षा का अधिकार कानून के क्रियान्वयन पर भी इससे असर पड़ सकता है। बता दें कि एनसीटीई पूर्व में बीएड डिग्रीधारकों कोभी प्राइमरीशिक्षक नियुक्त करने की अनुमति दे चुकाहै। लेकिन नियुक्ति के बाद उन्हें छह महीने की ट्रेनिंग हासिल करनी होगी। एनसीटीई जो नए नियम तैयार कर रहा है,उसमें पचास फीसदी अंकों के साथ स्नातक करने वाले बीएड कर सकेंगे। बीएड कोर्स दो सेमीस्टर में होगा। इसका नया सिलेबस भी तैयार कि या जा रहा है। इसमें शिक्षण के साथ-साथ शिक्षकों कोशिक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियों की भी जानकारीदीजाएगी ताकि वे छात्रों के समग्र विकास कर सकें ।
(मदन जैड़ा,हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)
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