मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

18 जनवरी 2011

दिल्लीःबच्चों के हिसाब से नहीं बढ़े सरकारी स्कूल

राजधानी में बीते पांच सालों में बच्चों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इसके साथ ही निजी स्कूलों की संख्या में सौ फीसदी बढ़ोतरी हुई, जबकि सरकारी स्कूलों में दस फीसदी भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। ऐसे में अपने बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए अभिभावक निजी स्कूलों पर निर्भर होते जा रहे हैं। अभिभावकों की इस मजबूरी का फायदा भी निजी स्कूल खूब उठा रहे हैं। मौजूदा समय में दिल्ली में सरकारी स्कूलों के लिए 637 भवन हैं, जिसमें सुबह और शाम की पालियों को मिलाकर कुल 937 सरकारी स्कूल हैं। इनमें 10वीं और 12वीं तक के स्कूल शामिल हैं। पाली बढ़ाकर स्कूलों की संख्या बढ़ा दी गई, लेकिन स्कूल भवनों की संख्या 637 ही है। बीते पांच सालों में दिल्ली में सरकारी स्कूल भवन की संख्या में 20 की बढ़ोतरी हुई, लेकिन 40 से 45 पाली बढ़ा दी गई थी। लेकिन कुछ सालों में दिल्ली सरकार ने कई सर्वोदय स्कूलों में शाम की पाली को बंद कर दिया है। दूसरी पाली के बच्चों को पहली पाली में शिफ्ट कर दिया गया, जिससे कई सरकारी स्कूलों में तीन से साढ़े चार हजार बच्चे हो गए हैं। ऐसे में पढ़ाई और बैठने का क्या हाल होता होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। पांच साल पहले राजधानी में छोटे-बड़े निजी स्कूलों की संख्या एक हजार के आसपास थी, जो अब बढ़कर 1950 हो गई है। ये सभी स्कूल दिल्ली सरकार और नगर निगम से मान्यता प्राप्त हैं। साथ ही विभिन्न इलाकों में कई दर्जन पब्लिक स्कूल बिना रजिस्ट्रेशन के चला रहे हैं या उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए निगम या सरकार के पास आवेदन कर रखा है। राजधानी में गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों (प्राइमरी और मिडिल) की संख्या करीब 1591 है(दैनिक जागरण,दिल्ली,18.1.11)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।