अभिभावकों की प्रोफेशनल एजुकेशन के आधार प्रोफाइलिंग नहीं की जा सकती। कानून के मुताबिक हर बच्चे को पढ़ने का अधिकार है और उसके अभिभावक के शिक्षित और अशिक्षित होने के आधार पर उसे दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकता।
नियमों का उल्लंघन होने की स्थिति में शिक्षा निदेशालय स्कूलों की दाखिला प्रक्रिया को रद्द भी कर सकता है।
दाखिले की सूची में नाम आने के बाद अभिभावक या बच्चे का इंटरव्यू भी लेना मना है।
ईडब्ल्यूएस के छात्रों से एक्टिविटीज फीस और एडमिशन फीस नहीं ली जा सकती है
नर्सरी दाखिलों के लिए उम्र सीमा तीन+ है
स्कूलों को एक माह के अंदर फीस रिफंड ही करनी होती है। कोई स्कूल रिफंड से इंकार नहीं कर सकता।
इस साल दाखिले के नियमों में किसी तरह का बदलाव नहीं है।
किसी भी ऐसे प्वाइंट को स्कूल प्राथमिकता नहीं दे सकते जिसमें भेदभाव की आशंका हो। न ही इन्हें दाखिले का आधार बनाया जा सकता है
शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर आप ऑनलाइन कर शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं
(लाइव हिंदुस्तान डॉटकॉम,17.1.11)
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