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17 जनवरी 2011

आईआईटी से भी महंगा नर्सरी दाखिला

दिल्ली-एनसीआर में स्कूलों में नर्सरी की फीस वर्तमान में आईआईटी से भी अधिक है। दाखिले में एक ब़ड़ी राशि के तनाव के लिए भी अभिभावकों को तैयार रहना है। नर्सरी में दाखिलों के लिए अभिभावक ए़ड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं तमाम औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद भी दाखिले की गारंटी नहीं है। निदेशालय ने चुप्पी साधी हुई है।

राजधानी में चल रहे नर्सरी स्कूल दाखिलों की कुछ सीटों के लिए हजारों अभिभावक जुटे हुए हैं। बच्चों के दाखिलों के लिए अभिभावकों को आईआईटी की वार्षिक फीस से भी अधिक पैसे भरने प़ड़ेंगे। अगर आईआईटी की फीस राशि को देखा जाए तो वह ५० हजार रूपए प्रति वर्ष आएगी। इसके साथ ही छात्रों को अलग-अलग खर्चों के लिए सालाना २०००० रूपए देने प़ड़ते हैं।


वहीं जब दिल्ली एनसीआर में नर्सरी स्कूल दाखिलों की बात होती है तो अभिभावकों को कम से कम ७५ हजार रूपए से अधिकद जेब ढीली करनी प़ड़ती है। प्रिसीडियम स्कूल का एडमिशन फीस एक लाख रूपए है, जीडी गोयंका स्कूल की कुल फीस ८० हजार रूपए है, अभिभावकों को मासिक फीस ११ हजार रूपए भरना प़ड़ेगा। रोहिणी के लांसर पब्लिक स्कूल का एडमिशन फीस भी ७५ हजार रूपए हैं। वो भी कठिन दाखिला प्रक्रिया और इंटरव्यू के बाद। ले देकर निजी स्कूल अभिभावकों से एक लाख रूपए वसूल लेती है। 


दूसरी ओर शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली कहते हैं कि नियमों का उल्लंघन उनके संज्ञान में है। विभाग अभिभावकों की शिकायत के बाद ही कार्रवाई कर सकता है। अगर लिखित शिकायत और स्कूल की पर्ची लेकर पहुंचता है तो कार्रवाई होगी। नर्सरी एडमिशन की जानकारी देने वाली वेबसाइट के वेबमास्टर सुमित वोहरा कहते हैं कि दिल्ली-एनसीआर में दाखिलों के लिए औसतन फीस ७५००० रूपए है। आईआईटी में इससे कम फीस सालाना लगती है। 

निजी स्कूल बेहतर शिक्षा, बेहतर सुविधा, बच्चों की देखरेख की दलील देते हैं। उन्होंने कहा कि सबकुछ सामने होते हुए भी शिक्षा निदेशालय चुप है। सोशल ज्यूरिस्ट अशोक अग्रवाल कहना है कि स्कूलों पर लगाम कसने की जरूरत है। स्कूल बिना सलाह लिए मन मुताबिक फीस ब़ढ़ाते हैं। निजी स्कूलों में फीस वृद्धि का मामला विचाराधीन है(नई दुनिया,दिल्ली,17.1.11)।

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