मौलाना आजाद प्रौद्योगिकी संस्थान टीक्यूप की खरीदी में गड़बड़ी तथा सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति के मामले में फर्जीवाड़ा करने वाले प्रोफेसरों से पूछताछ करने जा रहा है। संस्थान द्वारा दोषी पांच प्रोफेसरों व एक सुरक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस दिया गया था। मेनिट उन दो मामलों में प्रोफेसरों से पूछताछ करने जा रहा है, जिसमें सीबीआई रिपोर्ट पेश कर चुकी है। मामलों का निपटारा करने एडमिनिस्ट्रेटिव कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें कोई खास निर्णय नहीं हो पाया है। संस्थान इन मामलों में सिरे से पूछताछ करने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में करीब एक माह का समय लगेगा। सीबीआई की रिपोर्ट में टीक्यूप के माध्यम से खरीदी गई लाखों की मशीन और सुरक्षाकर्मी में हुए फर्जीवाड़े के मामले में पांच प्रोफेसर और एक सुरक्षा अधिकारी का नाम उजागर हुआ है। साल 2009 में सीबीआई में इन दोनों मामलों की शिकायत की गई थी। संस्थान के आला अधिकारियों का कहना था कि रिपोर्ट के मुताबिक हर प्रोफेसर और अधिकारी को नोटिस दिए गए थे। इनके जवाब को एडमिनिस्ट्रेटिव समिति की बैठक में रखकर निर्णय लिया जाना था कि दोषी प्रोफेसरों व अधिकारी पर क्या कार्रवाई करना है। बैठक में इन दोनों मामलों पर कोई खास निर्णय नहीं हो सका। बैठक में तय किया गया कि दोषी प्रोफेसरों से कमेटी के सदस्य पूछताछ करेंगे, जिसके बाद निर्धारित किया जाएगा कि दोषी प्रोफेसरों पर क्या कार्रवाई करना हैं। कौन बना दोषी सीबीआई ने टीक्यूप की सहायता से खरीदी गई मशीनों के मामले में तीन प्रोफेसरों को दोषी बताया है जिनमें एचके खैरा मैकेनिकल, संजय सोनी इलेक्ट्रानिक्स तथा एससी श्रीवास्तव एप्लाईड मेकेनिक्स विभाग में पदस्थ हैं। वहीं सुरक्षाकर्मी के मामले में एसपीएस राजपूत मैकेनिकल, सुधानंद सप्रे और सुरक्षा अधिकारी मनीष कुमार चौधरी जांच के घेरे में हैं। हालांकि श्री सप्रे ने बीआरएस ले लिया है और एमके चौधरी सेवानिवृत्त हो चुके हैं(दैनिक जागरण,भोपाल,17.1.11)।
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