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17 जनवरी 2011

यूपीःकॉलेजों की गलती भुगत रहे छात्र

साल भर पहले बढ़ाया गया नामांकन शुल्क (एनरॉलमेंट फीस) बीच सत्र में विद्यार्थियों के लिए सिरदर्द बन गया। पिछले साल वित्त समिति और कार्यपरिषद की बैठक में लिए गए इस निर्णय से कई महाविद्यालय अभी तक अनजान हैं। लविवि ने बढ़ी फीस की जानकारी वेबसाइट पर भी डाली लेकिन कॉलेजों ने इस जानकारी को देखना तक मुनासिब नहीं समझा। विवि की सख्ती के बाद कॉलेजों की नींद टूटी और उन्होंने छात्रों से वसूली शुरू कर दी है। वहीं कुछ जागरुक कॉलेज ऐसे भी हैं, जिन्होंने सत्र की शुरूआत में ही बढ़ी हुई फीस छात्रों से जमा करा ली थी। स्नातक में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को एक बार नामांकन शुल्क देना होता है। तकरीबन एक साल पहले लविवि ने नामांकन फीस दो सौ से बढ़ाकर एक हजार रुपये करने का प्रस्ताव रखा। विरोध के बाद कार्यपरिषद ने शुल्क पांच सौ रुपये करने का निर्णय लिया। इसकी सूचना उसी समय वेबसाइट पर जारी कर दी गई, जिसमें कॉलेजों को नए सत्र से बढ़ी हुई फीस ही जमा कराने के निर्देश दिये गए। लखनऊ विवि से कुल 107 महाविद्यालय संबंद्ध हैं। इनमें से लगभग 60 महाविद्यालयों ने 200 रुपये ही शुल्क जमा कराया। अब विवि ने फीस जमा करने के दौरान जब बढ़ी हुई फीस मांगीतो कॉलेजों की आंखें खुलीं। अब कॉलेज प्रशासन ने आनन फानन में छात्रों से कहा कि 300 रुपये अतिरिक्त जमा करें। सत्र के बीच में विद्यार्थी इस नये फरमान से हतप्रभ हैं। लविवि प्रवक्ता प्रो. एसके द्विवेदी ने कहा कि एक साल पहले फीस बढ़ाने का निर्णय हुआ था। जानकारी वेबसाइट पर जारी कर दी गई थी। जिन महाविद्यालयों ने कम शुल्क जमा किया है उनके परीक्षा फार्म रोके नहीं गए है। शेष शुल्क जमा करने के निर्देश दिए गए हैं(दैनिक जागरण,लखनऊ,17.1.11)।

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