इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बेहतरीन और बेशुमार संभावनाओं को देखते हुए, बारहवीं की परीक्षा देते समय विनीत (परिवर्तित नाम) ने निर्णय कर लिया था वह इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाएगा। अच्छे अंकों से पास होने के बाद उसने गाजियाबाद के एक नामी संस्थान में दाखिला लिया। अभी कोर्स खत्म होने में तीन महीने बाकी थे कि कैम्पस सिलेक्शन के लिए देशी विदेशी कंपनियां आ पहुंची। परीक्षाओं में अच्छी परफॉर्मेस की वजह से विनीत का सिलेक्शन इन्फोसिस में हो गया। वैसे इन्फोसिस ही नहीं बल्कि आईटी सेक्टर की दिग्गज भारतीय कंपनियां कैम्पस सिलेक्शन पर काफी जो दे रही हैं। जिससे उम्मीद की जा रही है कि खास तौर से फेशर्स के लिए संभावनाओं के द्वार बड़े पैमाने पर खुलेंगे।
क्या है वजह
सीएलएसए मैनपावर के आईटी एनालिस्ट, भवतोश वाजपेयी कहते हैं कि मौजूदा दौर आईटी कंपनियों के लिए तो बेहतरीन हो चला है, लेकिन आपसी प्रतिस्पर्धा बढ़ने की वजह से अब कंपनियों को अपना टैलेंटेड स्टाफ रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इन्फोसिस के सीनियर एचआर ऑफिसर की मानें तो पिछले कुछ महीनों में इन्फोसिस ने अपने स्टाफ की सैलरीज में 15 से 20 प्रतिशत तक का इन्क्रीमेंट किया है। बावजूद इसके, अपने टैलेंटेड स्टाफ को रोके रखने में कंपनी को काफी परेशानियां पेश आ रही हैं। उनका यह भी कहना है कि बीते तीन महीनों में महंगाई काफी बढ़ी है, ऐसे में सैलरीज के लिहाज से कर्मचारियों को असंतुष्ट होना स्वाभाविक कहा जा सकता है, लेकिन कंपनी की भी अपनी सीमाएं हैं। ऐसे में अगर कोई दूसरी कंपनी, अच्छा सैलरी पैकेज ऑफर कर देती है तो वे वहां जाना पसंद करते हैं। अपने टैलेंट स्टाफ को रोकने के अलावा कंपनी के साथ स्टाफ को अधिक समय तक जोड़े रखने के लिए अब आईटी कंपनियों ने नई जुगत भिड़ानी भी शुरू कर दी है।
कैम्पस प्लेसमेंट पर जोर
इस समस्या से निपटने के लिए कंपनियों ने अब कैम्पस प्लेसमेंट के जरिये फ्रेश स्टाफ को जोड़ने के प्रति अधिक रुचि दिखानी आरंभ की है। इन्फोसिस की ही बात करें तो बीते महीने कंपनी ने करीब 1100 कॉलेजों में 20 हजार ग्रैजुएट्स को अपनी कंपनी के साथ जुड़ने के लिए अप्वाइंटमेंट लैटर दिए हैं। इन्फोसिस के इस रास्ते को विप्रो ने भी अख्तियार किया है और इस आईटी कंपनी ने भी अपने साथ 8 हजार फ्रेश ग्रेजुएट्स जोड़े हैं। वैसे विप्रो ने इंजीनियरिंग के साथ नॉन इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को अपने साथ जुड़ने के लिए ऑफर लैटर दिए हैं। टीसीएस भी अब इसी राह पर चल पड़ा दिखता है। इस कंपनी ने दक्षिण भारत के विश्वविद्यालयों से एक हजार फ्रेशर्स का चयन किया।
सैलरी
जहां तक सैलरीज की बात है तो इन्फोसिस अपने फ्रेश स्टाफ को तीन से साढ़े तीन लाख रुपये वार्षिक का पैकेज ऑफर कर रही है। दूसरी तरफ विप्रो की बात करें तो बीते साल के मुकाबले इस साल विप्रो ने अपने फ्रेश स्टाफ को 20 फीसदी अधिक की सैलरी ऑफर की है। अमेरिकियों पर भी जोर बड़े पैमाने पर अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करने वाली भारतीय आईटी कंपनियां अब लोकल लेवल पर अमेरिका से ही एम्प्लॉइज को हायर कर रही हैं। टीसीएस के एक अधिकारी का इस बारे में कहना है कि मंदी की मार से बेहाल अमेरिका में बेरोजगारी बड़े पैमाने पर फैल चुकी थी, ऐसे में वहां सस्ता स्टाफ आसानी से मिल रहा था। लेकिन अब जबकि अमेरिकी इकोनॉमी भी मजबूत हो रही है तो निकट भविष्य में लगता है कि वहां मैनपावर एक बार फिर महंगी हो जाएगी। फिर भी जब तक अमेरिका में बेरोजगारी अधिक है तब तक भारतीय आईटी कंपनियां वहां का लोकल स्टाफ तो आसानी से अफोर्ड कर ही सकती हैं। विड़ला सनलाइफ एसेट मैनेजमेंट के महेश पाटिल कहते हैं कि आईटी कंपनियों के लिए मौजूदा दौर बेहतरीन है। अच्छा दौर इसी तरह बने रहने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह यह भी कही जा सकती है, क्योंकि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अब तेजी से सुधार हो रहा है(शिवाकान्त पाण्डेय,दैनिक जागरण,18.1.11)।
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