बिजनेस स्कूलों में प्रवेश के लिए इंटरव्यू प्रक्रिया चल रही है तो कहीं जल्द ही शुरू होने वाली है। कुछ साल नौकरी में बिताने के बाद अचानक एमबीए करने का निर्णय कई तरह के सवाल आपके सामने खड़े करता है, इन्हीं प्रमुख प्रश्नों के जवाब पर एक नजर डाल रहे हैं अंकुर वरिकुः
दुनियाभर में बिजनेस स्कूलों में प्रवेश के लिए निश्चित प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो महज प्रवेश परीक्षा और कार्यअनुभव तक सीमित नहीं होती। एडमिशन टीम को ऐसे उम्मीदवारों की तलाश होती है, जो नई सोच रखते हैं और रटे-रटाए सिद्धांतों को अपनाने की बजाए अपनी सोच और कार्य के बलबूते पहचान बनाना चाहते हैं। मैं एमबीए करने के इच्छुकों का लगभग पिछले चार साल से निरीक्षण कर रहा हूं। मैंने पाया कि काफी संख्या में उम्मीदवार इंटरव्यू प्रक्रिया के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते। यहां तक कि आधारभूत प्रश्नों की भी सही तैयारी नहीं होती। हालांकि आवेदन और निबंध लेखन के स्तर पर फोकस की कमी से पार पाया जा सकता है, पर इंटरव्यू के दौरान तैयारी में कमी को छुपाना मुश्किल होता है। इसलिए यहां चार प्रमुख प्रश्न दिए जा रहे हैं, जिन्हें इंटरव्यू पैनल के सम्मुख खुद को प्रस्तुत करने से पहले उम्मीदवारों को स्वयं से पूछना चाहिए।
अब मेरे लिए एमबीए करना क्यों जरूरी है?
कार्यस्थल पर 3 से 7 साल बिताने के बाद अक्सर उम्मीदवारों को एमबीए करना तर्क संगत कदम लगता है। पर क्या वो इसकी वजह जानने का प्रयास करते हैं? क्या उनके प्रोफाइल में कुछ कमी है जो कि उनकी भावी प्रगति को रोक रही है? क्या वे किसी ऐसे करियर में जाना चाह रहे हैं, जहां मैनेजमेंट की डिग्री उनके लिए फायदेमंद होगी? क्या उनके लिए बी-स्कूल नेटवर्क में शामिल होना अधिक महत्वपूर्ण होगा? कारण कोई भी हो, लेकिन इन पर विचार करना जरूरी है। ऐसे उम्मीदवार जो स्पष्ट रूप से जानते हैं कि अपनी अपनी एमबीए डिग्री से वे क्या चाहते हैं-स्किल्स सेट, एक्सपोजर, जानकारी, नेटवर्क आदि की स्पष्टता उम्मीदवारों के लिए बेहतर रहती है।
इंटरव्यू स्टेज में यह प्रश्न अक्सर प्रारंभ में पूछा जाता है। ऐसा कोई उत्तर नहीं दें, जिसको समझना मुश्किल हो, एमबीए करना मेरे बिजनेस को आगे बढ़ाएगा, एमबीए करने से करियर को प्रगति मिलेगी, एमबीए करने से मुझे लीडरशिप और मैनेजमेंट स्किल्स को समझने में मदद होगी आदि। ध्यान रखें, सिर्फ एमबीए करना यह सब पाने की गारंटी नहीं है। यह सोचना कि एमबीए करने से आप लीडर बन जाएंगे, वैसा ही है जैसा कि बल्ले को पकड़ने मात्र से सचिन तेंदुलकर बनना।
परमीत कामत, हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के पूर्व छात्र, जिन्होंने वर्ष 2005 में एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम ज्वॉइन किया था। सेल्स में पांच साल काम करने के बाद वह एक ऐसी भूमिका की ओर आगे बढ़ रहे थे, जहां ग्रोथ स्ट्रेटजी और लीडरशिप प्रोग्राम की जानकारी होना जरूरी था। एक विकल्प था कि वे उसी कंपनी में समान विभाग में काम करते रहते, पर इससे उनका इंडस्ट्री एक्सपोजर रुक जाता। वहीं दूसरी जगह नौकरी तलाशने में समान सेल्स प्रोफाइल में जॉब मिलने की अधिक संभावना होती।
आईएसबी के छात्रों से मिलकर कामत ने सोचा कि एमबीए करना सार्थक रहेगा। उन्होंने पाया कि आईएसबी सभी मानकों पर अग्रणी है। एक वर्षीय यह प्रोग्राम करके वे इंडस्ट्री में तेजी से वापसी कर सकते हैं।
एमबीए करने के बाद मैं क्या करना चाहता हूं?
यह एक उलझाव पैदा करने वाला प्रश्न है, जिस पर अक्सर उम्मीदवार गलती कर बैठते हैं। प्रत्येक उम्मीदवार सबसे अच्छी ऑफ कैंपस जॉब चाहता है, प्रमुख रूप से कंसल्टिंग और बैंकिंग उनकी प्राथमिकता होती है। पर कुछ ही जानते हैं कि जिस इंडस्ट्री में वे जा रहे हैं वहां उनकी भूमिका क्या होगी। एमबीए करने का निर्णय अधिकतर अधिक वेतन या अच्छे ब्रांड में प्रवेश के लिए होता है। पर यहां व्यावहारिक और वास्तविक अपेक्षाएं रखना जरूरी होगा। क्या आप आईटी इंडस्ट्री में दस साल काम करने के बाद इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में जाना चाहेंगे? एमबीए का सबसे अधिक फायदा उनको होता है, जो वापस उस इंडस्ट्री में जाते हैं, जहां से आए थे। एमबीए प्रवेश इंटरव्यू में सक्रिय रहने वाले कोलंबिया बिजनेस स्कूल, न्यूयॉक (2001 बैच) के राजीव सूद के अनुसार, यह सोचने वाली बात है कि उम्मीदवार महज अपना समय और पैसा खर्च करने में ही इस प्रश्न का जवाब देखते हैं, उन्हें लगता है कि बी-स्कूल में प्रवेश पा लेने से उत्तर खुद मिल जाएगा। पर ऐसा नहीं होता। इस संबंध में उम्मीदवार जितना स्पष्टत होगा, उतना इंटरव्यू पैनल के समक्ष खुद को बेहतर प्रस्तुत कर सकेगा। दो साल पहले सूद ने बैंकिंग में पांच साल तक का अनुभव रखने वाले एक उम्मीदवार का इंटरव्यू लिया। वह उम्मीदवार बॉलीवुड का जबर्दस्त फैन था। हमारा अधिकतर इंटरव्यू फिल्मों पर हुआ। उसकी जानकारी भी बहुत अच्छी थी। एमबीए के बाद उसका लक्ष्य बॉलीवुड-केन्द्रित फंड बनाना था, जिसे इक्विटी निवेश के तौर पर अल्पकालिक निर्देशकों के प्रोजेक्ट में लगाने की योजना थी। कागजों पर भले ही इसे बेहतर प्रतिक्रियाएं न मिलें, पर उस उम्मीदवार के पास जुनून था और नया विचार था। उस उम्मीदवार ने बताया, उसके पास फंड बनाने के लिए पैसा नहीं है। मैं अपना नेटवर्क बनाना चाहता हूं और इससे बेहतर नेटवर्क मुझे कहां मिलेगा। मैं मेरे निवेश का क्षेत्र जानता हूं, अब मुझे तलाश है ऐसे लोगों कि जिन्हें ये विचार प्रेरित करे। यह एक अर्थपूर्ण ईमानदार प्रतिक्रिया थी।
स्कूल की मुझसे क्या अपेक्षाएं हैं?
बिजनेस स्कूल इस तथ्य को चाहे कितना भी नकारें, लेकिन आजकल वह उन्हीं प्रोफाइलों की तलाश में रहते हैं जो अपेक्षाकृत ‘आसान’ हों। इस हिसाब से ऐसा प्रतीत होता है कि स्कूल प्रतिवर्ष एकसमान लोगों की तलाश में रहते हों। इसलिए अपनी स्थिति सुदृढ़ करना जरूरी होगा।
पुराने विद्यार्थी समूची प्रक्रिया से गुजर चुके हैं, और जानते हैं कि तथ्यों को किस तरह प्रस्तुत करना चाहिए। पूर्व विद्यार्थी आपके प्रोफाइल को एक विद्यार्थी की जरूरत के हिसाब से बनाने में मदद कर सकते हैं - वह स्कूल में क्या करने और क्या न करने और इंटरव्यू में अपनी प्रस्तुति बेहतर करने में मदद कर सकते हैं। इन पहलुओं को अनदेखा न करें।
न्यू हैंप्शायर के टक बिजनेस स्कूल के 2010 बैच के विद्यार्थी शांतनु माथुर विभिन्न बिजनेस स्कूलों की जरूरतों को परखने के अपने अनुभव के बारे में बताते हैं। माथुर एक ऐसे परिवार से जुड़े हैं जो कंसल्टेशन का काम करता था। इसलिए उन्हें आभास था कि अलग बिजनेस स्कूलों के इंटरव्यू के लिए उन्हें विभिन्न तरह की तैयारी नहीं करनी होगी। वह कहते हैं, ‘अपनी सूची के शीर्ष स्कूलों के पूर्व विद्यार्थियों से बात करने के बाद ही मुझे अहसास हो गया था कि मुझे अपने जवाब कैसे तैयार करने होंगे। उदाहरण के लिए, उनमें से एक ने सुझाया कि एक कंसल्टेंट के तौर पर मुझे अपनी विश्लेषण क्षमता को उभारना होगा क्योंकि उनका स्कूल इसी गुण को परखता है। मुझे सॉफ्ट स्क्ल्सि और क्लाइंट रिलेशनशिप पर भी ध्यान देना चाहिए।’ (अंकुर वरिकु इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के 2006 के बैच के विद्यार्थी हैं)
मेरे लिए यह स्कूल क्यों बेहतर है?
बी-स्कूल की अनुकूलता एक ऐसा मापक है, जिसे प्रवेश के इच्छुकों में सबसे कम महत्व दिया जाता है। जबकि यह जरूरी है। यदि आप किसी स्कूल के पूर्व छात्र अथवा प्रशासन से बात करेंगे, तो आपको स्कूल के संबंध में काफी जानकारी मिल जाएगी। बेहतर होगा यदि छात्र इस प्रक्रिया को आवेदन से पहले जानने का प्रयास करें।
पिछले कुछ समय में विशेषज्ञता पर जोर दिया जाने लगा है। इससे एक तरह की सोच रखने वाले लोग एक जगह इकट्ठे होते हैं। अत: जिस स्कूल में इंटरव्यू देने जा रहे हैं, वहां के विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों को समझों। यदि आप उद्यमी हैं या वेंचर कैपिटल स्पेशलिस्ट हैं, तो आपको अपनी प्राथमिकताओं में स्टैनफोर्ड का चुनाव करना चाहिए। कोलंबिया बिजनेस स्कूल का चुनाव करना उन लोगों के लिए बेहतर होगा जो वित्त कंसल्टिंग से जुड़े हैं। मेरा अनुभव बताता हैं कि अधिकतर उम्मीदवार अपने स्कूल का चुनाव पहले करते हैं और दूसरे प्रश्नों का जवाब बाद में तलाशते हैं। पर एक बार प्रवेश लेने के बाद आपके पास कोई चारा नहीं होता और आप खुद को उसके अनुसार ढालते हैं। मेरा मानना है कि कि उम्मीदवार को संस्थान की अनुकूलता जांचने के लिए कुछ समय वहां के पूर्व छात्र और प्रशासन के साथ बिताना चाहिए। यह बात आपके निर्णय को काफी प्रभावित करती है(हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)।
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