डॉक्टर बनने की ख्वाइश रखने वाल के लिए अच्छी खबर है। राजधानी में अब एक और मेडिकल कालेज खुलेगा, जिसमें एमबीबीएस की लगभग् 150 सीटें और 800 बेड का अस्पताल भी होगा। इस मेडिकल कॉलेज की बागडोर केंद्रीय सुरक्षा बल के हाथ में होगी। एडीजी मेडिकल पैरा-मिलिट्री फोर्सेस टी रवि प्रसाद के मुताबिक इस मेडिकल कालेज के खोलने का मुख्य मकसद सभी केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के करीब 10 लाख जवानों और उनके परिवार को सेवाकाल के दौरान तथा सेवानिवृत्ति के बाद अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराना है। इसके अलावा, अर्द्धसैनिक बलों के पैरा-मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करना और बीमारियों पर शोध को विशेष बढ़ावा देना भी है। प्रसाद ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि मेडिकल कालेज खोलने संबंधी प्रस्ताव पर फिलहाल गृह मंत्रालय सक्रियता से विचार कर रहा है। जल्द ही इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय अर्द्धसैनिक कॉलेज बलों के जवानों के परिवारों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए देशभर में हॉस्पीटल चेन खोलने का भी प्रस्ताव है। अगले वित्त वर्ष में सरकार इसे मंजूरी दे सकती है। केंद्रीय सुरक्षा बलों के इस अस्पताल का फायदा सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, एसएसबी, असम राइफल्स और एनएसजी के करीब 10 लाख जवानों को होगा। केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों के लिए अभी तक कोई ऐसा अस्पताल नहीं था। हालांकि ,एक रेफरल अस्पताल नोएडा में बनाने के लिए हाल ही में सरकारने मंजूरी दी थी। वैसे,विशेष बीमारियों के लिए आईटीबीपी का हाई एल्टीट्यूड डिजीज सेंटर और बीएसएफ के पास एक मलेरिया अनुसंधान केंद्र है।
(हरिकिशन शर्मा,हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)
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