मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

17 जनवरी 2011

गणित में काफी आगे हैं बिहार के बच्चे

देश में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार के बावजूद मिडिल स्कूल के दो तिहाई बच्चे अभी भी सामान्य जोड़-घटाव नहीं कर पाते, वहीं पांचवीं कक्षा के करीब 50 प्रतिशत बच्चे ठीक ढंग से दूसरी कक्षा की पुस्तक भी नहीं पढ़ पाते।

प्रथम शिक्षा फाउंडेशन की वार्षिक असर रिपोर्ट 2010 के अनुसार, औसतन स्कूली बच्चों की गणितीय गणना करने की क्षमता में गिरावट दर्ज की गई और कक्षा प्रथम के 35 प्रतिशत बच्चे एक से नौ तक की गिनती ठीक ढंग से नहीं कर पाते। 2009 में पाया गया कि कक्षा प्रथम के 31 प्रतिशत बच्चे एक से नौ तक की गिनती ठीक ढंग से नहीं कर पाते थे।

पिछले पांच वर्षों में स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई लिखाई में उम्मीद के अनुरूप सुधार नहीं दर्ज किया गया है और पांचवी कक्षा के सिर्फ 53.4 प्रतिशत बच्चे दूसरी कक्षा की पुस्तक पढ़ पाते हैं। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा जारी वार्षिक शिक्षा रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी कक्षा के 29 प्रतिशत बच्चे अभी भी एक से सौ तक की गिनती ठीक ढंग से नहीं कर पाते हैं। चौथी कक्षा के करीब 19 प्रतिशत बच्चे अंकगणितीय घटाव नहीं कर सकते हैं।

हालांकि 2009 में करीब 34 प्रतिशत बच्चे घटाव नहीं कर पाते थे। इसी प्रकार से पांचवी कक्षा के करीब 30 प्रतिशत बच्चे अंकगणितीय भाग नहीं कर पाते हैं जबकि 2008 में 55 प्रतिशत बच्चों को भाग की गणना करने में कठिनाई पेश आती थी(हिंदुस्तान,दिल्ली,17.1.11)।


उधर,बिहार में स्कूल से बाहर 6 से 14 वर्ष के बच्चों की संख्या वर्ष 2010 में घट कर 3.5 प्रतिशत हो गयी है। सामान्य गणित के सवालों को हल करने में प्रदेश के बच्चों की उपलब्धि राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट 2010 (असर रिपोर्ट) में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट शुक्रवार को दिल्ली में उपराष्ट्रपति ने रिपोर्ट जारी की। असर ने सभी जिलों में 977 विद्यालयों का रेंडम पद्धति से चयन कर उनका औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। वर्ष 2006 में असर रिपोर्ट के अनुसार 12.8 प्रतिशत बच्चे स्कूलों से बाहर थे जो 2010 की रिपोर्ट में घटकर 3.5 प्रतिशत हो गयी। वर्ष 2010 में स्कूलों में नामांकित बच्चों की संख्या बढ़ कर 96.5 प्रतिशत पर पहुंच गयी है। सरकारी विद्यालयों में 2006 में जहां 72.2 प्रतिशत नामांकित थे वहीं 2010 में यह संख्या बढ़ कर 89.8 प्रतिशत हो गयी। रिपोर्ट के अनुसार सूबे के कक्षा 8 के 69 प्रतिशत बच्चे सामान्य गणित में क्षेत्रफल के सवाल ठीक ढंग से हल कर सकते हैं जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 50 प्रतिशत ही है। वर्ष 2006 में 5 वर्ष की आयु के जहां 45.4 प्रतिशत बच्चे ही विद्यालय आते थे वर्ष 2010 में 52.7 प्रतिशत बच्चे आते हैं। इसी प्रकार वर्ष 2006 में आंगनबाड़ी व बाल वर्ग में 3 वर्ष के 49.1 प्रतिशत तथा 4 वर्ष के 57.7 प्रतिशत बच्चे आते थे। यह संख्या 2010 में बढ़ कर क्रमश: 74.5 तथा 78.9 प्रतिशत हो गयी है। रिपोर्ट में सरकारी विद्यालयों के अनुदान में वृद्धि की भी चर्चा है। वर्ष 2009-10 में 81.4 प्रतिशत विद्यालयों को स्कूल के रखरखाव तथा 79.6 प्रतिशत को स्कूल के विकास वास्ते अनुदान राशि प्राप्त हुई। वहीं 82.4 प्रतिशत विद्यालयों को टीचिंग लर्निग सामग्री के लिए अनुदान दिया गया(दैनिक जागरण,पटना,17.1.11)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।