प्रोन्नति में आरक्षण के सरकारी आदेश को निरस्त करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने सरकार के लिए सांसत पैदा कर रखी है। फैसले को आए लंबा समय बीतने के बाद भी सरकार तय नहीं कर सकी है कि इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाए कि नहीं। दूसरी ओर प्रोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर कर्मचारी संगठन पाले में बंट गए हैं। समर्थकों ने जहां आरक्षण बचाओ के नारे के साथ 24 अप्रैल को रैली का एलान कर दिया है वहीं दूसरे गुट ने सर्वजन हिताय संरक्षण समिति बना कर लखनऊ में जल्द ही प्रदेशस्तरीय सम्मेलन की घोषणा की है। सरकार की समस्या यह है कि इस फैसले को लेकर उठाया जाने वाला कोई भी कदम बसपा की सोशल इंजीनियरिंग को नुकसान पहुंचा सकता है। फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से जहां उसका ब्राहमण वोट बैंक नाराज हो सकता है, वहीं ऐसा न करने पर दलित वर्ग। एक समस्या यह भी है कि अगर अपील के बाद सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिली तो सरकार को उन अधिकारी-कर्मचारियों को भी पदावनत करना पड़ेगा जिन्हें 2007 से परिणामी ज्येष्ठता का लाभ देते हुए प्रोन्नत पदों पर बैठाया गया है। चुनाव नजदीक देख सरकार इस मुसीबत से बचना चाह रही है, पर अभी तक उसे कोई रास्ता सूझा नहीं है।
अब तक जारी है मंथन :
फैसले पर अभी तक सरकार में मंथन जारी है। हर पहलू को जांचा परखा जा रहा है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि मामला गंभीर है, ऐसे में इसमें निर्णय लेने में समय तो लगेगा ही। गौरतलब है कि चार जनवरी को हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण समाप्त करने और परिणामिक ज्येष्ठता संबंधी नियमावली की धारा 8अ को निरस्त करने का फैसला सुनाया था। धारा 8अ में प्रावधान है आरक्षित वर्ग का व्यक्ति ज्येष्ठता का लाभ पाकर प्रोन्नत होता है, तो भी उसे ज्येष्ठता का लाभ मिलेगा।
एक वजह यह भी :
प्रोन्नति में आरक्षण को खत्म करने के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के मामले में सरकार के असमंजस की वजह सुप्रीम कोर्ट का पूर्व में दिया गया निर्णय भी है। राजस्थान सरकार के बिल्कुल इसी तरह के आदेश को हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया था। फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गरी थी, जिसे उसने नवम्बर 2010 में खारिज कर दिया था। विभागों से सूची की दरकार कार्मिक विभाग ने वित्त, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, आवास, सिंचाई सहित कई विभागों से मई 2007 के बाद की गयी प्रोन्नत अधिकारियों-कर्मचारियों की सूची मांगी है। सूत्रों के अनुसार सरकार इसका आंकलन करना चाह रही है कि ऐसे कितने अधिकारी कर्मचारी है जो प्रोन्नति में आरक्षण के उसके आदेश के तहत पदोन्नति पा चुके हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2007 में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह नियम लागू किया था(दैनिक जागरण,लखनऊ,18.1.11)।
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