बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड में एक और घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। यह घोटाला वर्ष 2005 की मध्यमा परीक्षा में उजागर हुआ है । इसमें क रोड़ों रु पए के बंदरबांट की आंशका जतायी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड ने डा. राम विलास चौधरी की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित कर दी है । कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट बोर्ड को देगी। मामला आदर्श संस्कृत उच्च विद्यालय अमरपुर बांका से संबंधित है। यहां निर्धारित छात्रों से अधिक का परीक्षाफ ल अंकित पाया गया। बोर्ड के सचिव के मुताबिक बांका जिले के इस स्कूल की गणन पंजियों को देखने से पता चला कि कोड संख्या 1501 में निर्धारित छात्र संख्या 593 के बदले 595 छात्रों का परीक्षाफ ल अंकि त था। कोड संख्या 3702 में निर्धारित छात्र संख्या 514 के बदले 628 छात्रों का परीक्षाफ ल अंकि त पाया गया। इस संबंध में प्रोसेसर से स्पष्टीकरण पूछा गया पर कोई जवाब नहीं मिला। बोर्ड के अध्यक्ष ने जब 3702 कोड से संबंधित विद्यालय का निरीक्षण कि या तो आरोप को अभिलेखों के आधार पर सही पाया। इसके बाद अध्यक्ष ने मामले की जांच का आदेश दिया। विस्तृत जांच क र संचिका लाई गयी। इसमें निर्धारित छात्रों की संख्या से अधिक छात्रों का परीक्षाफल अंकित पाया गया। अब पटना विवि के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. राम विलास चौधरी की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसकी जांच करेगी। इस कमेटी में इग्नू स्पेशल स्टडी सेंटर पटना के अध्यक्ष कुमार शैलेन्द्र, संस्कृत शिक्षा बोर्ड के लेखा पदाधिकारी पीके क र्ण सदस्य हैं। मालूम हो कि पिछले साल प्रधान लेखाकार(लेखा परीक्षा) बिहार के लेखा परीक्षा दल द्वारा की गयी ऑडिट के दौरान वर्ष 2002-03 की रोकड़ बही गायब किये जाने से करोड़ों रु पए का घपला सामने आया था। कुछ माह पूर्व दरभंगा के महारानी लक्ष्मीश्वरी संस्कृत उच्च विद्यालय लक्ष्मीपुर आनन्दपुर, संस्कृत शिक्षकों द्वारा बोर्ड के पदाधिकारी व सहायकों की मिलीभगत से अवैध तरीके से लाखों के भुगतान का मामला भी चल रहा है(हिंदुस्तान,पटना,3.2.11) ।
-----------------------------------------------
बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने 1202 छात्रों का गलत तरीके से प्रमाण जारी करने का मामला पकड़ा है. इसमें करोड़ों रुपये की बंदरबांट की आशंका जतायी जा रही है.
-----------------------------------------------
बिहार राज्य संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने 1202 छात्रों का गलत तरीके से प्रमाण जारी करने का मामला पकड़ा है. इसमें करोड़ों रुपये की बंदरबांट की आशंका जतायी जा रही है.
गड़बड़ी पकड़े जाने पर बोर्ड के अध्यक्ष ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी है. कमेटी के सदस्यों को एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने के लिए निर्देशित किया गया है. संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद ने बताया कि बोर्ड के कुछ गलत लोगों की मिलीभगत से 1202 छात्रों का फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र जारी किया गया है.
मामले उस समय प्रकाश में आया, जब फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर विभिन्न जगहों पर नौकरी कर रहे लोगों के प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए आये. जांच में सभी प्रमाणपत्र फर्जी पाये गये. उन्होंने कहा कि 2005 मध्यमा परीक्षा की गणन पंजियों के अवलोकन से पता चला कि कोड संख्या 1501 में निर्धारित छात्र संख्या 593 के स्थान पर 595 छात्रों का परीक्षाफल अंकित है.
इसी प्रकार कोड संख्या 3702 में निर्धारित छात्र संख्या 514 के स्थान पर 628 छात्रों का परीक्षाफल अंकित है. इस संबंध में पोसेसर से स्पष्टीकरण पूछा गया. लेकिन, कोई जवाब कार्यालय से प्राप्त नहीं हुआ. उन्होंने बताया कि बोर्ड द्वारा 3702 कोड से संबंधित विद्यालय आदर्श संस्कृत उच्च विद्यालय अमरपुर, बांका का निरीक्षण किया गया, जिसमें आरोप को सही पाया गया.
बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि मामले की जांच के लिए पटना विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ राम विलास चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गयी है, जिसमें इग्नू स्पेशल स्टडी सेंटर, पटना के अध्यक्ष कुमार शैलेंद्र और संस्कृत बोर्ड के लेखा पदाधिकारी पीके कर्ण शामिल हैं. कमेटी को एक महीने के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है(प्रभात खबर,पटना,3.2.11).
दैनिक जागरण में दीनानाथ साहनी की एक्सक्लूसिव रिपोर्टः
जब छात्रों के बिना परीक्षा दिए ही डिग्रियां बांटी जा रही हों तो बेरोजगारों की फौज खड़ी होनी स्वाभाविक ही है। इस हालत में नौकरी के लिए मारामारी कोई बड़ी बात नहीं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी से बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड में एक ऐसे ही कारनामे का खुलासा हुआ है। जहां परीक्षा में न बैठने वाले 1202 छात्रों को भी डिग्रियां बांट दी गयीं। वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद और सचिव ओम प्रकाश शुक्ल ने इस रिजल्ट घोटाले की पुष्टि की है। फर्जी तरीके से डिग्री बांटने के तार बांका, भागलपुर, मुंगेर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी और समस्तीपुर जिले के परीक्षा केन्द्रों से जुड़े हैं। मसलन, 2005 की परीक्षा के लिए बांका जिले का कोड 3702 था। मगर फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की मेहरबानी से इस जिले में 37515 से 37628 तक फर्जी रोल नंबर दिखाकर बिना परीक्षा में शामिल कराए सैकड़ों परीक्षार्थियों को रिजल्ट दे दिया गया। इसी तरह पर अन्य जिलों के 68 परीक्षा केन्द्रों पर बोगस रोल नंबर के आधार पर अंक पत्र और मूल प्रमाणपत्र बांटे गए। यही ही नहीं फर्जी डिग्रियों को सही साबित करने के लिए बोर्ड कार्यालय में अति सुरिक्षत टीआर रजिस्टर के पन्ने भी फाड़ डाले गए। अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद ने बताया कि बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने शिक्षा माफियाओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की फर्जी डिग्रियां बेची हैं। वहीं करीब चार करोड़ रुपये का लोन घोटाला भी सामने आया है। इस बात का खुलासा होते ही बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष जयनारायण यादव तथा हेमचन्द्र झा के अलावा सचिव नरेश प्रसाद श्रीवास्तव पर अंगुलियां उठने लगी हैं। उधर, मामले की जांच के लिए पटना विवि के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामविलास चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में इग्नू स्पेशल स्टडी सेंटर के चेयरमैन कुमार शैलेन्द्र और बोर्ड के लेखा अधिकारी पीके वर्मा शामिल हैं।
दैनिक जागरण में दीनानाथ साहनी की एक्सक्लूसिव रिपोर्टः
जब छात्रों के बिना परीक्षा दिए ही डिग्रियां बांटी जा रही हों तो बेरोजगारों की फौज खड़ी होनी स्वाभाविक ही है। इस हालत में नौकरी के लिए मारामारी कोई बड़ी बात नहीं। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गयी जानकारी से बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड में एक ऐसे ही कारनामे का खुलासा हुआ है। जहां परीक्षा में न बैठने वाले 1202 छात्रों को भी डिग्रियां बांट दी गयीं। वर्तमान बोर्ड अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद और सचिव ओम प्रकाश शुक्ल ने इस रिजल्ट घोटाले की पुष्टि की है। फर्जी तरीके से डिग्री बांटने के तार बांका, भागलपुर, मुंगेर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी और समस्तीपुर जिले के परीक्षा केन्द्रों से जुड़े हैं। मसलन, 2005 की परीक्षा के लिए बांका जिले का कोड 3702 था। मगर फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की मेहरबानी से इस जिले में 37515 से 37628 तक फर्जी रोल नंबर दिखाकर बिना परीक्षा में शामिल कराए सैकड़ों परीक्षार्थियों को रिजल्ट दे दिया गया। इसी तरह पर अन्य जिलों के 68 परीक्षा केन्द्रों पर बोगस रोल नंबर के आधार पर अंक पत्र और मूल प्रमाणपत्र बांटे गए। यही ही नहीं फर्जी डिग्रियों को सही साबित करने के लिए बोर्ड कार्यालय में अति सुरिक्षत टीआर रजिस्टर के पन्ने भी फाड़ डाले गए। अध्यक्ष सिद्धेश्वर प्रसाद ने बताया कि बोर्ड के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने शिक्षा माफियाओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की फर्जी डिग्रियां बेची हैं। वहीं करीब चार करोड़ रुपये का लोन घोटाला भी सामने आया है। इस बात का खुलासा होते ही बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष जयनारायण यादव तथा हेमचन्द्र झा के अलावा सचिव नरेश प्रसाद श्रीवास्तव पर अंगुलियां उठने लगी हैं। उधर, मामले की जांच के लिए पटना विवि के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रामविलास चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी में इग्नू स्पेशल स्टडी सेंटर के चेयरमैन कुमार शैलेन्द्र और बोर्ड के लेखा अधिकारी पीके वर्मा शामिल हैं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।