भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार ने कार्रवाई शुरु कर दी है. पहली नजर बिहार प्रशासनिक सेवा के दागी अधिकारियों पर है. घपले-घोटाले में आरोपित अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच तेजी से चल रही है. जिन मामलों में प्रशासी विभागों ने अभियोजन चलाने की मंजूरी के लिए प्रस्ताव दिया है, उस पर विधि विभाग की राय मांगने के लिए संचिका वहां भेजी गयी है.
सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की संख्या फिलहाल 1500 है. इनमें से 200 के खिलाफ विभिन्न आरोप चल रहे हैं. इनमें से अधिकतर मामले घपले-घोटाले से संबंधित हैं. विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में 35 अधिकारी निलंबन की सजा भुगत रहे हैं. अब तक दो अधिकारियों को सेवा से बरखास्त कर दिया गया है और लगभग एक दर्जन पर कार्रवाई अंतिम चरण में है.
बिप्रसे के 200..शीघ्र ही विभाग फैसला लेगा. किशनगंज के प्रखंडों में तैनात रहे करीब छह बीडीओ पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है. हाल ही में एक प्रखंड विकास पदाधिकारी राम निरंजन चौधरी को सेवा से बरखास्त किया गया है.मुख्य सचिव कर रहे मॉनीटरिंग मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी खुद कार्रवाई की मॉनीटरिंग कर रहे हैं.
सूत्र बताते हैं कि श्री मुखर्जी जब ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव थे, उसी व किशनगंज के अधिकारियों ने अनियमितताओं को अंजाम दिया था, इसलिए वह दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के प्रति ज्यादा गंभीर हैं. सुपौल, सीतामढ़ी व शिवहर जिलों में सौर लैंप बांटने में हुई अनियमितता की भी फाइल खुल गयी है.
इसमें एक डीडीसी व कई बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई तय है. विधि विभाग से मांगी रायइधर, पटना नगर निगम के पूर्व अपर आयु वैद्यनाथ दास व एक अन्य अधिकारी विनय शरण, जो बिहार प्रशासनिक सेवा के हैं, उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए विधि विभाग से राय मांगी गयी है. परामर्श मिलते ही कार्रवाई होगी(प्रभात खबर,पटना,4.2.11).
स्वागत योग्य कदम !
जवाब देंहटाएंकुछ तो जागृत आई !