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03 फ़रवरी 2011

दिल्ली में नर्सरी दाखिलाः'लवली प्वाइंट सिस्टम' में उलझे अभिभावक

दिल्ली में नर्सरी दाखिले को लेकर त्रस्त अभिभावकों का गुस्सा सरकार पर फूट रहा है। अभिभावकों का कहना है कि दो दर्जन स्कूलों में फॉर्म भरने के बाद अगर भी अगर दाखिला नहीं हो रहा है तो सरकार ही कुछ करे।

नर्सरी के लिए बच्चों का स्कूलों में नाम न आने पर नाराज अभिभावक शिक्षा मंत्री से जवाब मांग रहे हैं। अभिभावकों का आरोप है शिक्षा मंत्री ने अपनी तरह से पूरी प्रक्रिया को तैयार किया। दिशा-निर्देशों से हटकर स्कूलों ने अपने फॉर्मूले तय किए लेकिन शिक्षा मंत्री ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं की। दक्षिणी दिल्ली में रहने वाले राहुल धर ने बताया कि उन्होंने दक्षिणी दिल्ली के २२ स्कूलों में फॉर्म भरे थे किसी स्कूल में नाम नहीं आया।

यही नहीं उनके बच्चे का नाम वेटिंग लिस्ट में भी नहीं है। एक अन्य अभिभावक नईमउद्दीन ने बताया कि उन्होंने १४ स्कूल में फॉर्म भरे लेकिन बच्चे को सभी स्कूल में सिर्फ घर से स्कूल दी दूरी के ही प्वाइंट मिले। उसे पहले बच्चे के लिए प्वाइंट नहीं मिले, ल़ड़का है इसलिए प्वाइंट नहीं मिले, सिबलिंग का प्वाइंट नहीं मिला क्योंकि पहला बच्चा इंजीनियरिंग कर रहा है, एल्युमनाई के प्वाइंट नहीं मिले क्योंकि दोनों अभिभावक बाहर से प़ढ़े हैं, ट्रांसफर का प्वाइंट नहीं मिला। अब बच्चे का दाखिला कहां करवाया जाए, किसी स्कूल की वेटिंग लिस्ट में भी बच्चे का नाम नहीं आया है। यह समस्या बहुत से अभिभावकों की है। पेशे से वैज्ञानिक डॉ. सुपरादीप कहते हैं कि महीनेभर की भाग-दौ़ड़ के बाद नतीजा शून्य में आया है। यह लवली प्वाइंट सिस्टम है। बच्चे का किसी भी स्कूल में नाम नहीं आया है। अब ऐसे अभिभावक क्या करें यह भी शिक्षा मंत्री को ही बताना चाहिए।


अभिभावक अब शिक्षा मंत्री से इसका विकल्प जानना चाहते हैं। अभिभावकों का कहना है कि प्वाइंट सिस्टम की दिक्कतों से शिक्षा मंत्री भी वाकिफ है लेकिन इसे लेकर कुछ नहीं किया गया। शिक्षा निदेशालय ने भी नाम के लिए स्कूलों को सर्कुलर भेजे लेकिन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूरी दाखिला प्रक्रिया सरकार और स्कूलों के सहमति से तैयार किया हुआ है। नर्सरी की वेबसाइट एडमिशंस नर्सरी डॉट कॉम के वेबमास्टर सुमित वोहरा ने बताया कि अभिभावकों में बहुत नाराजगी है। अभिभावकों का कहना है कि उनका पक्ष सरकार ने समझा ही नहीं। स्कूलों ने पूरी तरह से अपनी मनमानी चलाई है जिससे आम अभिभावक परेशान हो गए हैं। ईडब्लूएस श्रेणी के अभिभावक भी परेशान है। आरक्षण के बाद भी स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। स्कूलों के नियमों में अभिभावक पिस रहे हैं। कुछ स्कूल गरीबों को दाखिला भी प्वाइंट के आधार पर ही दे रहे हैं। ईडब्लूएस श्रेणी के अभिभावक अमित कुमार ने बताया कि कई स्कूलों ने प्वाइंट के आधार पर बच्चों का नाम चुना उसके बाद ड्रा दिए हैं। प्वाइंट सामान्य श्रेणी की तरह ही घर से स्कूल की दूरी, सिबलिंग आदि रखे गए। 

शालीमार बाग के मार्डन स्कूल ने भी इसी फॉर्मूले के आधार पर पहले ८८ बच्चों का चुनाव किया और फिर उनका ड्रा निकाला। शालीमार बाग के ही डीएवी स्कूल ने भी इसी तरह छात्रों का चुनाव किया जिसका ड्रा ८ फरवरी को होगा। एक अन्य अभिभावक ने बताया कि रोहिणी के जीडी गोयंका स्कूल ने अपनी वेबसाइट में १ फरवरी को ड्रा का समय दोपहर तीन बजे बताया लेकिन अभिभावकों को बिना सूचित किए ही ड्रा सुबह निकाल लिया गया। यही नहीं अभिभावकों को बिना सूचित किए ही ड्रा निकाला जा रहा है। इसके लिए अभिभावकों में नाराजगी है(नई दुनिया,दिल्ली,3.2.11)।

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