बेहतर मार्केटिंग किसी भी उत्पाद की बिक्री का मुख्य आधार होती है। यही बात फैशन जगत में भी लागू होती है। चाहे कोई भी ड्रेस हो, फुटवियर हो अथवा फैशनेबल एक्सेसरीज ही क्यों न हो, ग्राहकों तक उनकी पहुंच बने, इसके लिए जरूरी है कि उनकी मार्केटिंग ठीक ढंग से की जाए। फैशन प्रोडक्ट को ग्राहकों तक पहुंचाने में फैशन मर्केंडाइजर्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान माहौल में फैशन मर्केंडाइजिंग एक बढ़िया कैरियर विकल्प है।
कार्य प्रकृति
फैशन मर्केंडाइजर अथवा फैशन को-ऑर्डिनेटर किसी फैशन उत्पाद के सेल्स, प्रमोशन और डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जिम्मेदार होता है। खासकर अपेरल सेक्टर में वह गारमेंट प्रोडक्शन से लेकर मार्केट तक हर स्तर पर अपनी खास भूमिका निभाता है। मार्केट ट्रेंड पर उसकी नजर होती है और ग्राहकों की मांग के आधार पर ही वह प्रोडक्ट को मार्केट में लाता है। वह गारमेंट निर्माता कंपनियों को मार्केट टे्रंड के बारे में सलाह भी दे सकता है। डिस्ट्रीब्यूशन प्लानिंग, बायर मैनेजमेंट और ऑर्डर संबंधी जरूरतों को पूरा करने जैसी बातें उसके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आती हैं।
कैसे-कैसे कोर्स
फैशन मर्केंडाइजिंग में अच्छी सफलता मिले, इसके लिए जरूरी है किसी अच्छे संस्थान से संबंधित कोर्स किए जाएं। विभिन्न संस्थानों में फैशन ऐंड अपेरल मर्केंडाइजिंग संबंधित कई पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जो ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन दोनों ही स्तरों के हैं। ग्रेजुएशन स्तरीय कोर्स 4 साल का होता है, जबकि पोस्ट ग्रेजुएशन से संबंधित पाठ्यक्रम 2 साल का होता है। इन पाठ्यक्रमों में फैब्रिक और इसके प्रकार, डिजाइनिंग, फिनिशिंग, सेल्स, डिस्ट्रीब्यूशन आदि की जानकारी दी जाती है।
शैक्षणिक योग्यता
जो छात्र इस फील्ड में ग्रेजुएशन करना चाहते हैं, उनके लिए किसी भी संकाय से 12वीं उत्तीर्ण होना जरूरी है। पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के लिए छात्रों का ग्रेजुएट होना जरूरी है। जहां तक नामांकन प्रक्रिया का सवाल है, तो कुछ संस्थानों में छात्रों को प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना होता है, जबकि कुछ में अंकों के आधार पर भी प्रवेश मिल सकता है।
कहां हैं मौके
जिस तरह से रीटेलिंग का ट्रेंड बढ़ा है व फैशन ब्रांड्स के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है, उससे फैशन मर्केंडाइजरों के लिए मौके बढ़े हैं। इस क्षेत्र के ट्रेंड प्रोफेशनल्स को विभिन्न गारमेंट मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों में जॉब मिल सकता है। छोटे-बड़े सभी शहरों में रीटेलिंग और शोरूम बिजनेस का भी वे हिस्सा बन सकते हैं। एक्सपोर्ट हाउसेज में भी जॉब के मौके मिलते रहते हैं। यदि क्षमता है तो विदेशी बायर या रीटेलर्स के लिए भी काम करने का अवसर मिल सकता है। इसके अलावा फैशन मर्केंडाइजर फैशन डिजाइनरों की भी जरूरत बने रहते हैं। बाद में अनुभव और आर्थिक स्थिति के मद्देनजर खुद का काम भी शुरू किया जा सकता है।
आमदनी
फैशन मर्केंडाइजर की आमदनी उसके अनुभव और सेल्स क्षमता पर निर्भर करती है। शुरू में फैशन मर्केंडाइजर को 10 से 15 हजार रुपये सैलरी मिल सकती है। यदि इस फील्ड में खुद का काम किया जाए, तो आमदनी ज्यादा हो सकती है।
शिक्षण संस्थान
-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली व अन्य केंद्र
-जेडी इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
-सत्यम इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नोएडा
-स्कूल ऑफ आर्ट एंड फैशन टेक्नोलॉजी, देहरादून
-इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन डिजाइन, चंडीगढ़
-पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन, नई दिल्ली(के. राजीव,अमर उजाला,1.2.11)
उपयोगी जानकारी दी है आपने!
जवाब देंहटाएं