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03 फ़रवरी 2011

डीयू में खेल नीति के लिए समिति गठित

डीयू ने अपनी स्पोर्ट्स पॉलिसी को कारगर बनाने के मकसद के साथ एक कमिटी का गठन कर दिया है, जो यूनिवर्सिटी में खेलों की बेहतरी के लिए सुझाव देगी। इसके अलावा स्टूडेंट्स को दी जाने वाली सुविधाओं पर खास फोकस रहेगा। खेलों में रुचि रखने वाले स्टूडेंट्स को किस तरह से प्रोत्साहित किया जाए, इस बाबत नीति बनाई जा रही है। कमिटी सदस्यों ने कई मीटिंग भी कर ली हैं। स्पोर्ट्स पॉलिसी में बड़े बदलाव होंगे। इसका संकेत वाइस चांसलर प्रो. दिनेश सिंह ने भी दे दिया है और यह तय है कि गेम्स में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स को बड़ी रियायतें मिलने जा रही हैं।

प्रो. सिंह ने बताया कि जो स्टूडेंट्स स्टेट लेवल, यूनिवर्सिटी लेवल पर शानदार प्रदर्शन करेंगे और यूनिवर्सिटी का नाम रोशन करेंगे, ऐसे स्टूडेंट्स को एग्जाम में रियायत देने पर विचार चल रहा है। मसलन अगर कोई खिलाड़ी चार में से तीन पेपर में पास है, लेकिन एक पेपर को वह क्लियर नहीं कर पाया है, तो उसके खेल के प्रदर्शन के आधार पर उस पेपर में पास किया जा सकता है। खिलाडि़यों के लिए ग्रेस मार्क्स का प्रावधान करने पर भी विचार चल रहा है। प्रो. सिंह के मुताबिक, स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन की प्रक्रिया को लेकर भी कमिटी विचार कर रही है।


उधर, यूनिवर्सिटी सूत्रों ने बताया कि कमिटी में तीन मेंबर हैं। कमिटी देख रही है कि यूनिवर्सिटी में कौन-कौन से खेलों को बढ़ावा दिया जा सकता है और कौन सी नई सुविधाएं स्टूडेंट्स को दी जा सकती हैं। इसके अलावा स्पोर्ट्स में भाग लेने वाले स्टूडेंट्स को प्रैक्टिस के लिए मॉडर्न टेक्नॉलजी वाले उपकरण भी मुहैया करवाने पर बात हो रही है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यहां पर स्टूडेंट्स को वर्ल्ड क्लास फैसिलिटी मिलनी चाहिए, ताकि यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स जब नैशनल टीम में सिलेक्ट हों, तो वे डीयू का नाम रोशन करें। 

यह कमिटी स्पोर्ट्स कोटे के एडमिशन को लेकर भी नीति बना सकती है। दरअसल, पिछले साल डीयू ने स्पोर्ट्स ट्रायल कॉलेजों में नहीं करवाए, बल्कि यूनिवर्सिटी ने सेंट्रलाइज्ड ट्रायल कंडक्ट किए। स्टूडेंट्स के स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट को 75 पर्सेंट और फील्ड ट्रायल को 25 पर्सेंट वेटेज दी गई। यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स काउंसिल (यूएससी) के डायरेक्टर की निगरानी में इन ट्रायल को कंडक्ट करवाया गया। लेकिन सेंट्रलाइज्ड ट्रायल पर जमकर बवाल मचा और कई कॉलेजों ने तो स्पोर्ट्स कोटे के एडमिशन भी नहीं किए। अब कॉलेजों के स्पोर्ट्स टीचर ने वीसी से मांग की है कि सेंट्रलाइज्ड ट्रायल पॉलिसी पर फिर से विचार किया जाए और एक ऐसी नीति बने, जिसमें योग्य स्टूडेंट्स को ही स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन मिल सके। 

गौरतलब है कि स्पोर्ट्स कोटे के एडमिशन में धांधली की शिकायतें हर साल यूनिवर्सिटी के पास पहुंचती है। कई कॉलेजों में तो यह भी खुलासा हुआ था कि स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स किसी गेम्स में हिस्सा ही नहीं लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि कमिटी को स्पोर्ट्स एडमिशन के मामले में भी सुझाव देने को कहा गया है(भूपेंद्र,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,3.2.11)।

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