सरकार ने प्रदेश के सभी कालेजों में मानदेय शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक का फरमान जारी किया है। ऐसे में विवि और डिग्री कॉलेजों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इस निर्देश के बारे में सभी विश्र्वविद्यालयों को सूचित कर दिया गया है। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया है कि संबद्ध कॉलेजों को भी इस बारे में जानकारी दें। इससे पहले गत 15 दिसंबर को उच्च शिक्षा विभाग की शासन स्तर पर हुई बैठक में मानदेय पर नियुक्ति पर लचीला रुख अपनाया गया और 30 दिसंबर को जारी मीटिंग के कार्यवृत्त में मानदेय पर नियुक्ति को जारी रखने पर सहमति दी गई। अब उच्च शिक्षा विभाग की विशेष सचिव अनीता मिश्रा की ओर से जारी शासनादेश में मानदेय पर नियुक्तियां न करने को कहा गया है। शिक्षण संस्थानों के लिए समस्या शासन के इस फैसले से कालेजों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। प्रदेशभर के सैकड़ों कालेजों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। इन पर रेग्युलर नियुक्ति नहीं हो रही हैं। अधिकांश पद मानदेय शिक्षकों से ही भरे गए हैं। इनकी नियुक्ति की अनुबंध अवधि भी खत्म होने वाली है। शासन की रोक के बाद अब मानदेय पर नए सिरे से नियुक्ति नहीं हो सकेगी। ऐसे में इस सत्र में अनुबंध खत्म होने के बाद कालेजों में पढ़ाई कैसे होगी, यह अपने आप में एक बड़ा सवाल है। वैसे भी एक तरफ विवि अनुदान आयोग कालेजों पर सेमेस्टर सिस्टम लागू करने का दबाव बना रहा है तो दूसरी तरफ शिक्षकों की भर्ती पर भी रोक लगाई जा रही है।(दैनिक जागरण,मेरठ,3.2.11)।
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