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03 फ़रवरी 2011

उत्तराखंडःविकलांग कर्मियों संग यूटीसी कर रहा मजाक

क्या आप यकीन करेंगे कि महंगाई के इस दौर में भी सरकार, कर्मचारियों के एक तबके को एक से दो रुपये रोजाना भत्ते के नाम पर दे रही है। हद तो यह है कि ऐसी व्यवस्था चल रही है शारीरिक रूप से विकलांग कर्मचारियों के लिए। भत्ते के नाम पर यह मजाक हो रहा है उत्तराखंड परिवहन निगम (यूटीसी) के विकलांग कर्मियों के साथ। इन्हें अब भी विकलांग भत्ता महज 30 से 60 रुपये प्रति माह ही मिल रहा है। राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के लिए भत्ते की यह व्यवस्था अविभाजित यूपी के समय से चल रही है और राज्य बनने के दस साल बाद भी स्थिति जस की तस ही है। यह स्थिति तब है जबकि अन्य विभागों के विकलांग कर्मियों को वर्तमान में यह भत्ता 300 से 500 रुपये मिल रहा है। निगम के पात्र कर्मी अर्से से संबंधित विभागों का दरवाजा खटखटा रहे हैं लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई है। ऐसा लगता है कि समाज कल्याण विभाग व उत्तराखंड परिवहन निगम विकलांग लोगों के कल्याण को लेकर सरकार की तैयारियों को पलीता लगाने में जुटे हैं। निगम के विकलांग कर्मियों को विकलांग भत्ते का मामला इसका उदाहरण है। इन्हें अब भी ग्रेड पे के हिसाब से 30 से 60 रुपये मिल रहा है, यानी एक व दो रुपये रोज के हिसाब से। गौर करने वाली बात यह है कि थ्री-व्हीलर आटो व सिटी बसोंमें न्यूनतम किराया 4 से 5 रुपये है। अब इतने पैसे में विकलांग किस प्रकार आफिस आ-जा सकेंगे। अविभाजित यूपी के समय 20 फरवरी 1991 को इसे लागू किया था। राज्य गठन के बाद से सूबे में इसे दो बार बढ़ाया जा चुका है। वर्तमान में सभी विभागों व निगमों में ग्रेड पे के हिसाब से 300 से 500 दिया जा रहा है लेकिन परिवहन निगम में नहीं। प्रमुख सचिव समाज कल्याण विनीता कुमार के मुताबिक मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अब इस मामले में कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर इस बारे में आख्या मंगाई जा रही है(सत्येन्द्र पांडेय,दैनिक जागरण,देहरादून,3.2.11)।

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