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03 फ़रवरी 2011

बिहारःकार्यालयों और अधिकारियों के नाम उर्दू में भी लिखने के आदेश

अब राज्य के सभी कार्यालय, भवनों, सार्वजनिक स्थलों, सड़कों, और पार्कों आदि के साइन बोर्ड हिन्दी के साथ ही उर्दू में भी लिखे जाएंगे। यही नहीं राज्य के वरीय अधिकारियों से लेक र क नीय अधिकारियों के नेम प्लेट भी राज्य की दूसरी सरकारी भाषा उर्दू में लिखा रहेगा। मंत्रीमंडलीय सचिवालय विभाग के प्रधान सचिव अफजल अमानुल्लाह ने राज्य के सभी प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों समेत सभी विभागों के आला अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे कार्यालय, भवनों समेत अधिकारियों का नाम उर्दू में भी लिखवाएं। कोई भी अधिकारी इस आदेश की अनदेखी न करें । ऐसा इसलिए कि उर्दू-हिन्दी बिहार ही नहीं बल्कि सूबे की साझी संस्कृति की रीढ़ है । 

दरअसल पिछले कई वर्षों से सरकारी कार्यालयों व अधिकारियों के नाम उर्दू में भी रहने के लिए अवामी उर्दू निफाज कमेटी, बिहार तथा उर्दू से जुड़ी संस्थाएं इस बात की मांग कर रही थीं कि हिन्दी के साथ-साथ उर्दू में भी सभी भवनों, कार्यालयों व अधिकारियों का नाम लिखा रहे  ताकि उर्दू जानने वाले को तो आसानी हो ही साथ ही जो उर्दू नहीं जानते हैं उन्हें उर्दू जानने के प्रति उत्सुकता बढ़े। इसके लिए इन संस्थाओं ने कई बार पटना समेत सूबे के क ई जिलों में आन्दोलन भी किया था। यही नहीं मुख्यमंत्री नीतीश कु मार को भी उर्दू से प्रेम रखने वालों ने इसके लिए गुजारिश की थी। इधर कमेटी के मुख्य संयोजक अशरफ अस्थानवी ने क हा कि बिहार सरकार ने ऐसा फैसला कर उर्दू के साथ इंसाफ किया है । राज्य की दूसरी भाषा को उसका हक मिलना ही चाहिए था। श्री अमानुल्लाह ने कहा कि उर्दू राज्य की दूसरी भाषा है इसलिए ऐसा आदेश दिया गया है । इससे न केवल उर्दू का राज्य में विकास होगा बल्कि उर्दू सीखने के प्रति लोगों में उत्सुक ता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सूबे के सभी अधिकारियों को उर्दू में कार्यालय, भवनों, स्मारकों, सड़कों, पार्कों के साथ अधिकारियों के नेमप्लेट भी लिखने को कहा गया है(मो. सिकंदर,हिंदुस्तान,पटना,3.2.11) ।

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सही आदेश है यह। उर्दू हमारे मुल्क की बेहतरीन भाषा है और इसे हर भारतीय को सीखना ही चाहिए। बहुत अच्छी पोस्ट लिखी सर आपने। इस समाचार को और हाईलाइट करना चाहिए आय थिंक।

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