तमिलनाडु व नागालैंड से दूरवर्ती पाठच्यक्रम में एमफिल करने वालों को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापक परीक्षा में शामिल होने के योग्य नहीं माना है। इसी वजह से उन्हें इंटरव्यू में शामिल नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने भी पीएससी के तर्को से सहमत होकर याचिकाकर्ता छात्रों का अंतरिम राहत आवेदन अस्वीकार कर दिया। पीएससी ने पिछले वर्ष सहायक प्राध्यापकों के 878 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराए थे।
इसमें प्रदेश के कुछ ऐसे आवेदकों ने भी आवेदन किया, जिन्होंने तमिलनाडु और नागालैंड जाकर दूरवर्ती पाठच्यक्रम के माध्यम से एमफिल किया था। ऐसे छात्रों को परीक्षा के बाद इंटरव्यू में शामिल नहीं किया।
इसकी वजह बताई गई कि छत्तीसगढ़ में सभी विषयों में एमफिल करने की सुविधा है। इसके बाद दूसरे राज्य के दूरवर्ती कोर्स की एमफिल को मान्यता नहीं दी जा सकती।
जिन राज्यों के दूरवर्ती पाठच्यक्रम से याचिकाकर्ताओं ने एमफिल किया है, उसे छत्तीसगढ़ शासन ने मान्यता नहीं दी है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग 18 याचिकाएं दायर की गई थी।
उनमें कहा गया था कि उनके द्वारा जिन यूनिवर्सिटी से एमफिल किया गया है, वे यूजीसी व शासन से मान्यता प्राप्त हैं इसलिए उन्हें भी इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम राहत का आवेदन देते हुए इंटरव्यू में शामिल होने की अनुमतिकी मांग की थी।
कोर्ट ने सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद आवेदन स्वीकार करने योग्य नहीं पाया। आज मामले की सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सहित कुछ और पक्षकारों का जवाब न आने पर कोर्ट ने उन्हें जवाब के लिए समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी(दैनिक भास्कर,रायपुर,4.2.11)।
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