चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी ने साल 2011 के उन प्राइवेट स्टूडेंट्स की मुश्किलें कम कर दी हैं, जिनके एग्जाम फॉर्म जमा करने से कॉलेज मना कर देते हैं। इस बारे में यूनिवर्सिटी का कहना है कि स्टूडेंट्स एग्जाम फॉर्म से संबंधित कॉलेज का नाम काटकर दूसरे ऐसे कॉलेज में जमा कर सकते हैं जहां पर सीट खाली हैं। अगर कॉलेज के मना करने के बावजूद सीटें खाली पाई गईं तो ऐसे कॉलेज प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्टूडेंट्स को कॉलेज में एग्जाम फॉर्म जमा करने के साथ रजिस्ट्रेशन की रसीद की प्रति लगानी अनिवार्य होगी।
प्रिंसिपल ने किया था विरोध
रामचमेली चड्ढा विश्वास गर्ल्स डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आर. सी. शर्मा ने बताया कि हाल ही में यूनिवर्सिटी स्तर पर मीटिंग आयोजित हुई थी। इसमें प्रिंसिपल ने विरोध जताया था कि जिस कॉलेज में जितने स्टूडेंट्स के एग्जाम दिए जाने की क्षमता है, उनमें उतने ही स्टूडेंट्स को एग्जाम फॉर्म जमा करने का मौका मिलना चाहिए। कुछ समय पहले कॉलेजों में एग्जाम फॉर्म भरने वाले स्टूडेंट्स की पर्सेंटेज का क्राइटेरिया निश्चित होता था। कॉलेजों से स्टूडेंट्स को सीधे एग्जाम फॉर्म जारी किए जाने से स्टूडेंट्स की क्षमता के अनुसार ही एग्जाम फॉर्म जमा कराए जाते थे। कॉलेजों ने किसी तरह के विवाद से बचने के लिए अपने यहां प्राइवेट एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स की क्षमता की जानकारी भेजी थी। अब यूनिवर्सिटी ने कॉलेज और स्टूडेंट्स दोनों की समस्या का हल ढूंढ लिया है जिससे कॉलेजों को भी राहत मिल गई है।
सीसीएस का निर्देश
सीसीएस ने कॉलेजों को निर्देश दिया है कि साल 2011 के ऐसे प्राइवेट स्टूडेंट्स जिन्होंने यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर एग्जाम फॉर्म भरते समय विशेष कॉलेज का नाम भी भर लिया है। पर जब वे संबंधित कॉलेज में एग्जाम फॉर्म जमा करने पहुंचते हैं और वहां सीटें खाली नहीं होने के कारण कॉलेज जमा करने से मना करते हैं। तो ऐसे स्टूडेंट्स, जिन्होंने ऑनलाइन एग्जाम फॉर्म में कॉलेज का नाम भरते हुए बैंक में फीस भी जमा कर दी है वे कॉलेज का नाम काटकर जिस कॉलेज में स्थान रिक्त है, वहां पहुंचकर एग्जाम फॉर्म जमा कर सकते हैं। कॉलेज प्रिंसिपल को यह एग्जाम फॉर्म स्वीकार करना होगा। हालांकि स्टूडेंट्स को संबंधित कॉलेज के रजिस्ट्रेशन की रसीद की प्रति एग्जाम फॉर्म के साथ संलग्न करनी अनिवार्य होगी।
पिछले साल झेली थी मुसीबत
सीसीएस यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर एग्जाम फॉर्म अपलोड होने से पहले ही कॉलेज प्रिंसिपल ने यूनिवर्सिटी को पत्र भेजकर मांग की थी कि जिन कॉलेजों में प्राइवेट स्टूडेंट्स के लिए एग्जाम देने के लिए जितनी क्षमता है। उतने ही एग्जाम फॉर्म जमा कराए जाएं। ऐसा नहीं होने पर कॉलेजों को बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। दो साल पहले तक स्टूडेंट्स को कॉलेज से संख्या के अनुरूप ही एग्जाम फॉर्म वितरित किए जाते थे लेकिन पिछले साल से प्राइवेट एग्जाम में ऑनलाइन सिस्टम शुुरू किया था। जिस कारण कॉलेजों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था। ऑनलाइन एग्जाम फॉर्म भरने के बाद कॉलेज में स्टूडेंट्स के जमा करने के लिए पहुंचने पर फॉर्म स्वीकार करना कॉलेजों के लिए जरूरी बन गया था।
(नवभारत टाइम्स,गाजियाबाद,4.2.11)
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