नर्सरी दाखिलों के लिए कई स्कूलों ने अपने पत्तों को खोल दिया है। स्कूलों के परिणाम आने के बाद जहां कुछ अभिभावकों की चिंता काफूर हो गई है तो कुछ की परेशानी बढ़ गई है। कई अभिभावकों को अपने मनपंसद स्कूल में दाखिला मिल गया है तो कुछ का नाम किसी भी सूची में नहीं आया है। पर इस बार नर्सरी दाखिलों में एक नया ट्रेंड देखने में आया है। इस बार कई स्कूलों में दाखिलों में लड़कों को जगह ही नहीं मिली है तो कई स्कूलों में 80 फीसदी से अधिक सीटों पर लड़कियों ने कब्जा जमा लिया है।
द्वारका के बीजीएस स्कूल में करीब 80 फीसदी सीटों पर लड़कियों ने कब्जा जमाया है तो कमोबेश यही हालात आईटीएल स्कूल का है जहां पर अधिक संख्या में लड़कियों को दाखिला मिला है। एन.के. बगरोडिया और मॉडर्न कांवेट में भी ऐसे ही हालात देखने में आए हैं जहां लड़कियों ने दाखिलों में बाजी मारी है। एक अभिभावक ने कहा कि मेरा एक लड़का और एक लड़की है। लड़की को दाखिला मिल गया है लड़के को नहीं मिला।
सिबलिंग एलुमनी का ट्रेंड इस बार नर्सरी दाखिलों में काफी चला है। नर्सरी दाखिलों में अब तक आए स्कूलों के परिणामों में यही देखने में आया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल द्वारका, डीपीएस वसंत कुंज, इंडियन स्कूल में यही ट्रेंड देखने में आया था। डीपीएस, द्वारका की सूची में एक भी नाम ऐसा नहीं है जिसमें सिबलिंग एलुमनी न हो। पिछले वर्ष सिबलिंग एलुमनी का ट्रेंड भी काफी चला था। इस मामले में एक्सपर्ट कहते हैं कि सिबलिंग एलुमनी का ट्रेंड इस बार भी खूब चला है।
ऐसा क्यों है?
ऐसा ट्रेंड होने की बड़ी वजह स्कूलों में गर्ल प्वाइंट मिलना है। वहीं लड़कों को सिर्फ पहले पैदा होने के आधार पर ही अंक मिल सकते हैं। इस बार ईडब्ल्यूएस सीटों की संख्या में इजाफा होने की वजह से भी सामान्य वर्ग की सीटें कम हुईं हैं। जिसका असर भी देखने में आया है। कई स्कूल गर्ल चाइल्ड के प्वाइंट भी देते हैं और पहले पैदा होने के प्वाइंट भी। ऐसे में अगर कोई लड़की पहले पैदा हुई है तो उसके चयन की संभावना बढ़ जाती है।
अभिभावक बोले, स्कूल राजधानी के बच्चों को दें प्राथमिकता
नर्सरी दाखिले की लिस्ट आने के साथ ही शिकायतों की अर्जी आनी शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय में अभिभावकों ने शिकायत कर कहा है कि सरकार नियम बनाए जिससे पहले राजधानी के बच्चों को दाखिला मिले और बाद में एनसीआर के बच्चों को। फेडरेशन ऑफ पैरेंट्स पब्लिक स्कूल, दिल्ली के अध्यक्ष अजय कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूल वाले विकास फंड में राजधानी के अभिभावकों से ज्यादा एनसीआर के अभिभावकों को महत्व दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में स्थानीय बच्चे दाखिले से बाहर हो जाते हैं।
दाखिला सूची : अब इनकी बारी
वीएसपीके इंटरनेशनल 02 फरवरी
द हेरिटेज स्कूल 03 फरवरी
एल्कॉन पब्लिक स्कूल 05 फरवरी
बाल भारती पब्लिक स्कूल 05 फरवरी
विकास भारती पब्लिक स्कूल 05 फरवरी
प्रेसीडियम स्कूल 07 फरवरी
सेंट थॉमस स्कूल 08 फरवरी
फादर एंजेल स्कूल 10 फरवरी
स्प्रिंगडेल्स स्कूल 12 फरवरी
(अनुराग मिश्र,हिंदुस्तान डॉटकॉम,दिल्ली,2.2.11)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।