दिल्ली विश्वविद्यालय में सिस्टम सुधारने के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदम के दूसरे दिन कुलपति प्रो दिनेश सिंह ने मंगलवार को शिक्षकों की ओर हाथ बढ़ाया। उनसे मदद मांगी और बेहतर माहौल बनाने की अपील की। इसके लिए आयोजित संवाद कार्यक्रम में विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों ने सिस्टम को सुधारने और बेहतर करने के एक से एक सुझाव दिए और लगे हाथ शिकायतें भी कीं। किसी ने छात्र हितों को सर्वोपरि मानकर सवाल और सुझाव दिए तो किसी ने शिक्षक बिरादरी का। सोमवार को छात्रों से संवाद हुआ था।
विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के बहुउद्देश्यीय हॉल में आयोजित कार्यक्रम में प्रो सिंह ने शिक्षकों से प्रशासन के साथ पिछले एक साल के संबंधों में आई कड़वाहट को मिटाने की बात कही। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों का सहयोग अपेक्षित है। दोनों के साथ मिलने से ही काम होगा। शिक्षकों हित में कई प्रस्तावित योजनाएं भी पेश कीं। उन्होंने कहा कि आनेवाले समय में विश्वविद्यालय में एक करोड़ ヒपये का फंड इनोवेटिव प्रोग्राम के लिए होगा। उन्होंने इनोवेटिव प्रोग्राम में शामिल होने के लिए योजना तैयार करने को कहा। इसके तहत वे इंटरडिसिप्लनरी पाठ्यक्रम, लैब या साहित्य से जुड़े प्रोजेक्ट विवि प्रशासन को दे सकते हैं। प्रशासन इसके लिए फंड मुहैया कराएगी। इस प्रोग्राम में तीन शिक्षक और दस छात्र एक साथ काम कर सकते हैं। प्रो सिंह ने कहा कि एक टास्क फोर्स बनाने के लिए ऐलान किया जो सेमेस्टर, इनोवेटिव प्रोग्राम और अन्य बाधाओं को देखेगी। प्रशासन चलाने के लिए शिक्षकों से संवाद बनाए रखने के लिए फेस बुक पर उपलब्ध रहने का आश्वासन दिया। शिक्षकों से कहा कि वे अपनी समस्याएं और सुझाव फेसबुक और मेल के जरिए कुलपति और अन्य अधिकारियों को दें। पाठ्यक्रम और अन्य योजनाओं को तैयार करने में जरूरत के मुताबिक शिक्षकों की राय लेने की बात भी कही। उनके इस संबोधन के बाद संवाद सत्र में कॉलेजों के कोर्स प्रभारी ने ढेर सारे सुझाव भी दिए और प्रशासन की खामियों की ओर ध्यान दिलाया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में आम शिक्षक सेमेस्टर से ज्यादा इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया से परेशान दिखे। मंगलवार को शिक्षकों ने सेमेस्टर पर मनमाने तरीके से बनाए गए पाठ्यक्रम, अध्ययन सामग्री और संसाधनों की कमी की ओर कुलपति का ध्यान दिलाया। कुलपति प्रो दिनेश सिंह ने कॉलेज शिक्षकों के इन सुझावों और शिकायतों पर विचार करके काम करने का आश्वासन दिया।
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के हॉल में कुलपति प्रो. दिनेश सिंह के संबोधन के बाद सवाल जवाब सत्र में सत्यवती कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य शम्सुल इस्लाम ने प्रशासन से राजनीतिशास्त्र और इतिहास में अध्ययन सामग्री की गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कॉलेज में ८० फीसदी से भी अधिक छात्र हिन्दी माध्यम के हैं लेकिन उन्हें ज्यादातर सामग्री अंग्रेजी माध्यम की मिलती है। रामजस कॉलेज के इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ विकास वर्मा ने भी हिन्दी में अध्ययन सामग्री की कमी और प़ढ़ाई की ओर ध्यान दिलाया। शिवाजी कॉलेज की चिनॉय ने भी इस समस्या की ओर ध्यान दिलाया। अरविन्दो कॉलेज के शिक्षक संजय त्यागी ने प्रशासन और पाठ्यक्रम चलाने में अपनाए जा रहे भेदभाव की ओर ध्यान दिलाया। श्यामलाल कॉलेज के राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कंप्यूटर तो २५० दिए गए लेकिन लैब और कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं है। कुलपति प्रो सिंह ने अगले दो माह में ऑपरेटर मुहैया कराने का वादा किया। श्रद्धानंद कॉलेज के एसपी त्यागी ने पाठ्यक्रम तैयार करने में आम शिक्षकों की राय भी लेने की बात कही। एलएसआर के डॉ पंकज ने सेमेस्टर शुरू करने में जिस तरह से कायदे कानून ताक पर रख दिया गया इस पर ध्यान दिलाया। मनीषा चक्रवर्ती और प्रमोद शर्मा ने स्पोर्ट्स दाखिले में विषय शिक्षकों की अनदेखी और प्रशासन की मनमानी दूर करने को कहा। कई शिक्षकों ने कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक प्रशासन चलाने में पारदर्शिता लाने का सुझाव दिया। शिक्षकों ने प्रशासन से बाहरी कॉलेज में प्लेसमेंट और संसाधन बेहतर करने की मांग रखी(नई दुनिया,दिल्ली,2.2.11)।
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