देश में बढ़ती व्यवसायिक शिक्षा की मांग को देखते हुए अब केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इसके लिए विशेष ‘वोकेशनल सेल’ शुरू करने जा रहा है।
बोर्ड की ओर से शुरू होने वाले इस विशेष सेल का मूल उद्देश्य न सिर्फ व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना है, बल्कि बोर्ड की ओर से स्कूल स्तर पर छात्रों के लिए उपलब्ध पुराने कोर्सो को बाजार की मांग के अनुरूप बनाना है। विशेष सेल के माध्यम से बोर्ड की नजर कहीं न कहीं नए कोर्सो की शुरुआत पर भी है।
बोर्ड चैयरमैन विनीत जोशी ने बताया कि देश-विदेश में बढ़ती व्यवसायिक शिक्षा की मांग को देखते हुए अब स्कूल स्तर पर ही छात्रों को उनकी रुचि के मुताबिक ऐसे पाठ्यक्रम उपलब्ध कराया जाना जरूरी हो गया है जो भविष्य के लिहाजा से उपयोगी है।
बोर्ड चैयरमैन ने बताया कि सीबीएसई पहले से ही ऐसे कई कोर्सो को नौंवी कक्षा से ही छात्रों के लिए उपलब्ध करा रही है और कई कोर्सो को शुरु करने की तैयारी भी जारी है।
उन्होंने कहा कि इन कोर्सो के बेहतर संचालन और कार्यक्षेत्र के बदलते मिजाज को देखते हुए आज के दौर में बेहद जरूरी हो गया कि इनमें समय-समय बदलाव होता रहे।
बस, इसी काम को एक यूनिट के तौर पर अंजाम देने के लिए सीबीएसई अलग से एक विशेष वोकेशनल सेल शुरू करने जा रहा है।
याद रहे कि बोर्ड की ओर से उपलब्ध करीब 29 विभिन्न प्रकार के वोकेशनल कोर्सो में कुछ ऐसे भी हैं जो छात्रों व उनके अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।
इसका कारण यह है कि इन पाठ्यक्रमों को करने वाले छात्रों को 12 वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिए जाने पर दाखिले के दौरान काफी परेशानी होती है। ऐसा ही एक पाठ्यक्रम फाइनेंशियल मार्केट मैनेजमेंट (एफएमएम) है, जिसके प्रति छात्रों का रुझान केवल इसलिए कम हो रहा है क्योंकि इस कोर्स को करने वाले छात्रों को विश्वविद्यालय स्तर पर ग्रेजुएशन के दाखिले के दौरान खासी परेशानी होती है। डीयू इस कोर्से को वोकेशनल कोर्स मानता है और छात्र इसे एकेडमिक कोर्स के तौर पर शमिल करने की बात करते हैं(शैलेन्द्र सिंह,दैनिक भास्कर,दिल्ली,4.2.11)।
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