सालों से महज 15 हजार रुपए में चल रहा बैचलर ऑफ एजूकेशन (बीएड) का पाठ्यक्रम अचानक महंगा हो गया है। इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए छात्र-छात्राओं को 50 हजार रुपये तक फीस देना पड़ेगी। कालेज संचालक भी बेधड़क होकर दोगुनी वसूली कर सकते हैं। इस वसूली पर न तो छात्र कोई आपत्ति कर सकेंगे और न राज्य शासन ही कालेजों को रोक सकेगा। कालेजों को दोगुनी फीस वसूली का अधिकार दिया है मध्यप्रदेश प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण कमेटी ने। कमेटी ने सत्र 2009-10 और 2010-11 के लिए जो फीस तय की है, उसके तहत अब सभी कालेज खुलेआम 40 से 50 हजार रुपए तक वसूल सकते हैं। इस राशि की रसीद भी कालेज दे सकते हैं। जबकि अभी तक प्रदेश के छात्र 15 हजार रुपए देकर हाथ झाड़ लेते थे। बाहरी राज्यों के छात्रों को जरूर कालेजों की मुंहमांगी फीस देना पड़ती थी। इसके अलावा उन्हें केवल परीक्षा फीस देना होती थी। अब कोई भी छात्र सस्ते में नहीं निपट सकता। उसे करीब 50 हजार रुपए जमा करने के बाद ही छुटकारा मिलेगा। असल में कमेटी ने एक मुश्त 25 हजार रुपए फीस घोषित करने के अलावा कॉशन मनी, पेनाल्टी, बस, हॉस्टल तथा ट्रेनिंग व प्लेसमेंट की फीस का भी प्रावधान रखा है। इसकी अधिकतम सीमा भी कमेटी ने ही तय कर दी है। यह पूरी राशि मिलाकर 50 हजार तक पहुंच जाती है। हालांकि यह सभी शुल्क अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि उपयोग करने वाले छात्रों से ही वसूली जाना है। मगर कालेज संचालकों के लिए कमेटी द्वारा किया गया यह प्रावधान ही वसूली का सबसे बड़ा जरिया बन जाएगा। काउंसलिंग ने कराए जलवे : अभी तक मात्र 15 हजार रुपए होने के बाद भी अधिकांश छात्र टोकन मनी देकर प्रवेश लेते थे, बाकी राशि परीक्षा के समय ही दी जाती थी। अब 5000 रुपए तो ऑन लाइन पंजीयन के समय ही जमा कराना पड़ रहे हैं। वहीं प्रवेश लेते समय भी 20 हजार रुपए का बैंक ड्राफ्ट जमा करना है। ऐसे में कालेजों को 100 छात्रों के एकमुश्त 25 लाख रुपए मिल जाएंगे। साल भर इस राशि का ब्याज भी कालेज ले सकेंगे।
उधर,राज्य के एमबीए कालेज अपनी मनमर्जी से छात्रों से फीस वसूलने लगे हैं। ऐसे ही एक कालेज की शिकायत फीस कमेटी में आई हैं। कालेज पिछले सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों से वर्तमान सत्र की निर्धारित फीस ले रहे हैं। पिछले सत्र की अपेक्षा वर्तमान की फीस अधिक घोषित होने का कालेज अनुचित फायदा उठा रहा है। इंदौर का गुजराती समाज कालेज एमबीए में 2009-10 में प्रवेश लेने वाले छात्रों से वर्तमान सत्र के लिए निर्धारित फीस ले रहे हैं। कालेज ने सेकेंड इयर में पढ़ रहे छात्रों को अधिक फीस जमा करने का फरमान जारी कर दिया है। छात्रों ने इसकी शिकायत फीस कमेटी में दर्ज करा दी है। शिकायत मिलते ही कालेज को वही फीस लेने के आदेश दिए जा रहे हैं जो पिछले सत्र में निर्धारित हुई थी। छात्रों ने अधिक फीस देने से इंकार किया तो कालेज ने कमेटी द्वारा वर्तमान सत्र की निर्धारित फीस का आदेश दिखा दिया है। आदेश देख कुछ छात्र फीस देने तैयार हो गए थे। क्या कहता है नियम कमेटी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कालेज छात्रों से वही फीस ले सकते हैं जो उनके प्रवेश सत्र के दौरान निर्धारित की गई थी। यदि कोई कालेज पिछले सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों से आगामी सत्र की घोषित अधिक फीस लेता है तो कालेज पर उचित कार्रवाई की जाएगी।(दैनिक जागरण,भोपाल,3.2.11)।
उधर,राज्य के एमबीए कालेज अपनी मनमर्जी से छात्रों से फीस वसूलने लगे हैं। ऐसे ही एक कालेज की शिकायत फीस कमेटी में आई हैं। कालेज पिछले सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों से वर्तमान सत्र की निर्धारित फीस ले रहे हैं। पिछले सत्र की अपेक्षा वर्तमान की फीस अधिक घोषित होने का कालेज अनुचित फायदा उठा रहा है। इंदौर का गुजराती समाज कालेज एमबीए में 2009-10 में प्रवेश लेने वाले छात्रों से वर्तमान सत्र के लिए निर्धारित फीस ले रहे हैं। कालेज ने सेकेंड इयर में पढ़ रहे छात्रों को अधिक फीस जमा करने का फरमान जारी कर दिया है। छात्रों ने इसकी शिकायत फीस कमेटी में दर्ज करा दी है। शिकायत मिलते ही कालेज को वही फीस लेने के आदेश दिए जा रहे हैं जो पिछले सत्र में निर्धारित हुई थी। छात्रों ने अधिक फीस देने से इंकार किया तो कालेज ने कमेटी द्वारा वर्तमान सत्र की निर्धारित फीस का आदेश दिखा दिया है। आदेश देख कुछ छात्र फीस देने तैयार हो गए थे। क्या कहता है नियम कमेटी के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि कालेज छात्रों से वही फीस ले सकते हैं जो उनके प्रवेश सत्र के दौरान निर्धारित की गई थी। यदि कोई कालेज पिछले सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों से आगामी सत्र की घोषित अधिक फीस लेता है तो कालेज पर उचित कार्रवाई की जाएगी।(दैनिक जागरण,भोपाल,3.2.11)।
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