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02 फ़रवरी 2011

मैनेजर ऑफ थ्री-एम

कॉरपोरेट और बिजनेस व‌र्ल्ड में मैनेजर्स की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। ऑर्गेनाइजेशन की तमाम जिम्मेदारियां निभाने के साथ अपनी टीम को मैनेज करते हुए उन्हें समय की पाबंदियों का ध्यान रखते हुए बेहतर रिजल्ट देना होता है। आप भी अपनी ऑर्गेनाइजेशन को ऊपर ले जाने के साथ करियर बेहतर बनाने के लिए खुद में ऐसे गुण विकसित करना चाहते हैँ और बनना चाहते हैं सुपर मैनेजर, तो कुछ बातों पर ध्यान दें। 

बढि़या तालमेल 
सिटी 360 मीडिया नेटवर्क के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट) डॉक्टर पुष्कर श्रीवास्तव कहते हैं कि यदि आप अपने कलीग, सबऑर्डिनेट्स (मैनपॉवर), मशीन और कंपनी के बिजनेस (मैटीरियल्स) के साथ बेहतर तालमेल बनाकर रखते हैं, तो आप सुपर मैनेजर साबित हो सकते हैं। अच्छे मैनेजर को हमेशा डिफरेंट सेक्टर्स के एम्प्लॉयी के साथ बातचीत करते रहना चाहिए, जिससे नए आइडियाज सामने आ सकें और ऑफिस में ट्रांसपिरेंसी भी बनी रहे। साथ ही खुद को बॉस न समझकर टीम का हिस्सा बनने की कोशिश करें। 

नेगोशिएशन स्किल 
टॉप लेवल के मैनेजर के पास नेगोशिएशन स्किल का होना आवश्यक है। एक अच्छे नेगोशिएटर के रूप में मैनेजर अपनी कंपनी की ग्रोथ के लिए अधिक से अधिक लाभ तलाशता रहता है। 

रहें अपडेट 
मैनेजर्स के लिए जरूरी है कि वे अपनी नॉलेज अपडेटेड रखें। जरूरत हो तो करियर बूस्ट-अप करने वाला कोर्स भी कर सकते हैं। कई बिजनेस स्कूल हैं, जो वर्किग मैनेजर के लिए विशेष और एडवांस कोर्स तो चलाते ही हैं। साथ ही सेमिनार और वर्कशॉप भी ऑर्गेनाइज करते हैं। 

फॉलो करें रूल्स 
हर कंपनी के अपने रूल्स और रेगुलेशंस होते हैं। आपक अपनी कंपनी की गाइडलाइंस जरूर फॉलो करें। सबऑर्डिनेट्स से ऊंची आवाज में बात करना, उन पर धौंस जमाना, बैड मैनर्स में आते हैं। सामने वाले व्यक्ति की बात यदि आपको गलत लगती है, तो उसे प्रेमपूर्वक समझाएं। शायद आपको इस बारे में जानकारी हो कि ऐसे सीईओ की संख्या बहुत अधिक हैं, जिन्हें अपने सबआर्डिनेट्स के साथ गलत व्यवहार के कारण बाहर का रास्ता दिखाया गया हो। सुपर मैनेजर वही हैं, जो अपने स्वभाव से हमेशा अपने आस-पास का माहौल सौहार्दपूर्ण बनाए रखते हैं(स्मिता,दैनिक जागरण,दिल्ली,1.2.11)

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