जिला स्तरीय समान परीक्षा योजना इस साल भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। अधिकांश जगह निजी स्कूलों की मनमानी कायम है और वे सरकारी स्कूलों के प्रश्न पत्रों को ताक में रख रहे हैं। इसके बावजूद ऎसे निजी स्कूलों पर लगाम कसने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। उदयपुर जिले में माध्यमिक शिक्षा में ऎसे पांच और प्रारंभिक शिक्षा में दो मामले सामने आए हैं, जिनमें सिर्फ प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने ही मात्र नोटिस देने की कार्यवाही की है।
दरअसल, स्पष्ट नियम है कि अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों को छोड़ अनुदानित, गैर अनुदानित स्कूलों में भी जिला स्तरीय समान परीक्षा व्यवस्था के तहत तैयार होने वाले प्रश्न पत्र ही काम में लिए जाने अनिवार्य हैं। कुछ स्कूल ऎसे हैं जिन्होंने स्पष्ट रूप से सरकारी प्रश्न पत्र लेने से इनकार कर दिया। कई निजी स्कूल ऎसे हैं जहां नया सत्र शुरू हो चुका है। यह किसी से छिपा नहीं है, लेकिन विभागीय कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं है।
पूरे राज्य में चल रही है परीक्षा
बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षाओं को छोड़ कर अन्य कक्षाओं की वार्षिक परीक्षा पूरे राज्य में चल रही है। अधिकांश निजी स्कूल इसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं।
ऎसा भी हो रहा है
कुछ ऎसे स्कूल भी हैं जो समान परीक्षा के प्रश्न पत्र उठा तो रहे हैं, लेकिन काम में उनके द्वारा बनाए गए प्रश्न पत्र ही ले रहे हैं।
कहते हैं ये
अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को छोड़ सभी पर समान परीक्षा व्यवस्था लागू है। निजी स्कूल अपनी मनमानी नहीं कर सकते।
-सम्पतलाल मण्डोवरा, जिला शिक्षा अघिकारी प्रारंभिक(राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,17.4.11)
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