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17 अप्रैल 2011

मध्यप्रदेशःकॉलेजों में होगा एमसीए छात्रों का टोटा

मास्टर कम्प्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) में साल दर साल प्रवेश का स्तर गिरता जा रहा है और इसकी फीस आसमान छू रही है। सत्र 2011-12 में दाखिले के कुल सीट के पचास फीसदी आवेदन ही आए हैं। वहीं वर्तमान सत्र की फीस 31 हजार 500 रुपए प्रति सेमेस्टर तक तय की गई है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि फीस का पैरामीटर ऐसे ही बढ़ता रहा तो दाखिले का स्तर और नीचे चला जाएगा। प्रदेश की तकनीकी शिक्षा में सबसे ज्यादा खराब स्थिति एमसीए पाठ्यक्रम की है। इस पाठ्यक्रम में दाखिला लेने के लिए कभी छात्रों में खींचतान चलती थी और आज आलम ये है कि इसमें कोई निशुल्क प्रवेश लेना नहीं चाहता। इसकी वजह प्लेसमेंट का अभाव, समयावधि अधिक तथा आसमान छूती फीस। ऐसी स्थिति में पिछले साल प्रदेश के 17 कालेजों ने एमसीए में ताले लगा दिए थे। वर्तमान में भी कुछ कालेज इस पाठ्यक्रम को बंद करने का मन बना रहे हैं।


बढ़ती गई फीस
प्रवेश एवं फीस समिति की अपीलीय प्राधिकरण ने 28 कालेजों ने फीस बढ़ाने के अपील की थी, इसमें से मात्र 11 कालेजों की फीस में परिवर्तन किया गया। शेष कालेजों की फीस में कोई फेरबदल नहीं हुआ। फीस में करीब एक से पांच हजार रुपए तक बढ़ाए गए हैं। इसमें अधिकतम फीस 31 हजार 500 रुपए तय की गई हैं। फीस कम करने की आरजू : फीस का निर्धारण प्रवेश एवं फीस कमेटी ने किया था। फीस तय होने के बाद कालेजों में प्रवेश का सिलसिला शुरू हुआ। प्रवेश होने पर कालेजों ने फीस बढ़ाने अपीलीय प्राधिकरण में अपील लगाई। कम प्रवेश देख प्राधिकरण ने इनकी फीस कम करने को कहा। तब कालेजों ने अपनी फीस को यथावत रखने की आरजू की। वहीं कुछ कालेजों ने यह भी कहा कि उनकी फीस को कम की जाए ताकि आगामी सत्र में प्रवेश और कालेज की स्थिति में सुधार हो सके।

पाठ्यक्रम से कतराते हैं छात्र 
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम दो साल के होते हैं और एमसीए तीन साल का है। इसमें उन्हीं छात्रों को दाखिला दिए जाते हैं जिनकी बारहवीं गणित से और बीसीए किया हो। ऐसे में छात्र छह साल में एमसीए कर पाता है। छात्र एमसीए की बजाय इंजीनियरिंग में दाखिला लेकर छह साल में एमटेक कर लेते हैं। वहीं एमसीए छात्र को लेक्चरर बनाना हो तो उसे दो साल एमटेक को देना होंगे। पाठ्यक्रम की समयावधि अधिक होने के कारण पर इसमें प्रवेश लेने से कतराते हैं। इसी वजह से सत्र 2010-11 की आठ हजार से ज्यादा सीटों पर बामुश्किल साढ़े चार हजार में दाखिले हो पाए। वहीं मप्र व्यावसायिक परीक्षा मंडल की पिछले माह हुई प्रवेश परीक्षा में करीब चार हजार छात्र शामिल हुए हैं। ऐसे में फीस का ग्राफ ऊपर उठा तो कालेजों में गिनती के छात्र ही प्रवेश लेंगे। 

किसकी फीस बड़ी
ओरिएंटल इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नालाजी भोपाल 25 हजार 27 हजार 500 
ओरिएंटल इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड टेक्नालाजी-2 भोपाल 25 हजार 27 हजार 500 
मेडीकेप्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नो मैनेजमेंट इंदौर 27 हजार 500 29 हजार 
मेडीकेप्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी एंड मैनेजमेंट 27 हजार 350 29 हजार 
स्कूल आफ कम्प्यूटर एंड इलेक्ट्रानिक्स, आईपीएस एकेडमी इंदौर 27 हजार 500 31 हजार 500 
जीआईसीटीएस कालेज ग्वालियर 18 हजार 500 22 हजार 800 
श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट इंदौर 21 हजार 900 23 हजार 350 
आईटीएम ग्वालियर 22 हजार 800 27 हजार 500 
आईआईटीएम ग्वालियर 22 हजार 800 27 हजार 500 
स्कूल आफ कम्प्यूटर एंड इलेक्ट्रानिक्स आईपीएस 27 हजार 500 30 हजार 500(विकास जैन,दैनिक जागरण,भोपाल,17.4.11)

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