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18 अप्रैल 2011

उच्च शिक्षा में महिलाएं बहुत पीछे

भारत में उच्च शिक्षा में महिलाएं पुरुषों से बहुत पीछे हैं। यह जानकारी सरकार के नवीनतम आंकड़ों से उजागर होती है। यह असमानता प्रोफेशनल कोर्सों के प्रवेश में और भी अधिक है, जहां महिलाएं स्पष्टरूप से अल्पमत में हैं।
शैक्षिक सत्र 2010-2011 के प्रारंभ में भारत में उच्च शिक्षा में 146.25 लाख ने प्रवेश लिया, जिनमें से महिलाएं मात्र 60.80 लाख हैं। विश्वविद्यालय और कालेजों में यह प्रतिशत केवल 41.6 प्रतिशत बनता है।
स्वतंत्रता के समय उच्च शिक्षा में महिलाओं का प्रवेश 10 प्रतिशत से भी कम था। लेकिन लिंगभेद समाप्त करने पर प्रतिबद्ध होने के बावजूद 64 वर्षों में हम अधिक आगे नहीं बढ़ सके।
उच्च शिक्षा में महिलाओं का प्रवेश आधे से कम होने के अतिरिक्त प्रोफेशनल कोर्सों में यह और भी कम है। इस वर्ष के आरंभ में केवल 18.45 प्रतिशत महिलाओं ने प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय से प्राप्त नवीनतम जानकारी में चिंताजनक प्रवृत्ति यह भी है कि लड़कियां तकनीकी पाठ्यक्रमों में प्रवेश कम ले रही हैं और वे आर्ट्स विषयों को पसंद करती हैं। उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाली 60.80 लाख लड़कियों में से 46 प्रतिशत (27.76 लाख) ने आर्ट्स पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया है। विज्ञान विषय कुल महिलाओं में से केवल 19 प्रतिशत ने ही लिया है। तकनीकी और इंजीनियरिंग विषयों में तो हालत और भी खराब है। इनमें मात्र 7.69 प्रतिशत महिलाओं ने ही दाखिला लिया है। मेडिकल शिक्षा तो केवल 3.86 प्रतिशत लड़कियां ही ग्रहण करती हैं।
भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) में भी लिंगानुसार शैक्षिक समानता अभी दूर की बात है(अदिति टंडन,दैनिक ट्रिब्यून,दिल्ली,18.4.11)।

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