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17 अप्रैल 2011

यूपी में एससी छात्रों का शैक्षिक स्तर सुधारने की पहल

प्रदेश सरकार प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए दो सौ ऐसे विद्यालयों को अनुदान देगी जहां पचास फीसद से ज्यादा अनुसूचित जाति के बच्चे पढ़ रहे हैं। यह व्यवस्था नये सत्र से लागू कर दी जाएगी। इसमें ज्यादातर स्कूल पूर्वी उत्तर प्रदेश के होंगे। चयनित स्कूलों को हर साल छह लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा जो स्टाफ के वेतन व निर्माण कार्य पर खर्च होगा। स्कूलों की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। नये सत्र से चयनित स्कूलों को अनुदान मिलना शुरू हो जाएगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश में शिक्षा का स्तर काफी नीचे है। यहां के कक्षा पांच तक के लगभग 65 फीसद बच्चे ठीक से हिंदी भी नहीं पढ़ पाते हैं। उसमें भी अनुसूचित जाति व जनजाति के बच्चों की शिक्षा का स्तर ज्यादा खराब है। इसे देखते हुए सरकार ने दो सौ ऐसे विद्यालयों को अनुदान देने का निर्णय लिया है, जहां 50 फीसद या उससे ज्यादा बच्चे अनुसूचित जाति व जनजाति के पढ़ रहे हों। इसके लिए आठ अगस्त से नौ सितम्बर 2010 तक विद्यालयों से आवेदन मांगे गये थे। इनमें उन स्कूलों का चयन होना है, जिनकी स्थाई मान्यता दस साल पुरानी हो तथा स्कूल में कम से कम दो सौ बच्चे पढ़ रहे हों। स्थाई भवन होने के साथ किसी प्रकार का प्रबंधकीय विवाद न हो और शिक्षकों की नियुक्ति में आरक्षण की व्यवस्था लागू हो आदि मानक तय किये गये हैं। इसके लिए जिला स्तर पर कमेटी बनायी गयी है, जिसमें जिलाधिकारी को अध्यक्ष व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व समाज कल्याण अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। लगभग 1250 स्कूलों का प्रस्ताव जिलों की कमेटियों के माध्यम से शासन को भेज दिया गया है। उनके चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। चयनित स्कूलों को सालाना छह लाख रुपये अनुदान दिया जाएगा, जिसमें पांच लाख रुपये वेतन पर व एक लाख रुपये निर्माण कार्य पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ ही अनुदानित स्कूलों को बच्चों से किसी प्रकार की फीस लेने पर प्रतिबंध होगा। इस बारे में प्रमुख सचिव समाज कल्याण बलवंत कुमार ने कहा कि अनुसूचित जाति के बच्चों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। सप्ताह भर में स्कूलों का चयन कर लिया जाएगा और अनुदान की धनराशि मुहैया करा दी जाएगी, जिससे नये सत्र में व्यवस्था लागू की जा सके(रामेन्द्र प्रताप सिंह,राष्ट्रीय सहारा,लखनऊ,17.4.11)।

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