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17 अप्रैल 2011

राजस्थानःओबीसी को छात्रवृत्ति में कंजूसी

अन्य पिछड़ा वर्ग के उच्च शिक्षा में अध्ययनरत छात्रों को छात्रवृत्ति देने में राज्य सरकार कंजूसी बरत रही है। पिछले तीन साल में राज्य सरकार ने बजट प्रावधान के बावजूद आधी राशि भी नहीं दी। इस कारण बीएड व अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी तो छात्रवृत्ति का इंतजार ही करते रह गए।
राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए वर्ष 2006-07 में बीएड शिक्षा को भी छात्रवृत्ति योजना में शामिल किया था।
कैसे मिलेगी छात्रवृत्ति

ओबीसी छात्रवृत्ति के लिए प्राथमिकता तय करते हुए श्रेणियां निर्घारित कर रखी है। इसमें सबसे पहले बीपीएल वर्ग विद्यार्थी, इसके बाद विकलांग, विधवा, परित्यक्ता, विधवा के बच्चे, परित्यक्ता के बच्चों को छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। इसके बाद यदि बजट शेष रहता है तो शेष राशि मेडिकल, इंजीनियरिंग व अन्य व्यावसायिक शिक्षा के साथ ही बीएड और स्नातक स्तर की शिक्षा पाने वाले विद्यार्थियों को दी जाएगी। सरकार के छात्रवृत्ति की राशि मांग के अनुरूप नहीं देने से कई दफा यह बीएड और स्नातक के छात्रों तक तो पहुंच ही नहीं पाती। 
प्राथमिकता तय करते हुए श्रेणियां बना देने से यह पहले ही खत्म हो जाती है। गत तीन वर्षो से हजारों बीएडधारी छात्रवृत्ति के लिए सामाजिक न्याय एवं अघिकारिता विभाग के चक्कर काट रहे हैं। बीएड छात्रों को बीएड फीस जितनी ही छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है, लेकिन वे इससे वंचित है। 
मांगा क्या, मिला क्या 
गत तीन सालों में जोधपुर जिले को ओबीसी वर्ग के लिए जारी 1.47 करोड़ की छात्रवृत्ति राशि बीएडधारियों तक पहुंचने से पहले ही मेडिकल व इंजीनियरिंग छात्रों के हाथों तक सिमट गई। छात्रों को एक नुकसान और हो रहा है। वह यह कि किसी साल छात्र को छात्रवृत्ति नहीं मिली तो अगले साल उस छात्रवृत्ति के समयोजन का प्रावधान भी नहीं है।
अपर्याप्त है बजट 
'कई सालों से ओबीसी छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने से बीएडधारी सहित कई पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां नहीं दी जा सकी। मुख्यालय को अघिक राशि जारी करने के प्रस्ताव भेजे हुए हैं।' 
अनिल व्यास, उप निदेशक , सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,17.4.11)

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