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17 अप्रैल 2011

फार्मेसी छात्रों के भविष्य से खेल रहा है बरकतउल्ला विश्वविद्यालय

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग में प्रोफेसरों का टोटा है। इसलिए पीजी छात्रों ने स्नातक छात्रों को पढ़ाने का जिम्मा अपने कंधों पर उठा रखा है। प्रोफेसरों का वेतन यूजीसी मापदंडों के आधार पर नहीं होने पर विभाग की अध्ययन व्यवस्था चरमरा गई है। उधर विवि का विभाग के प्रति रुखा रवैया देख छात्र भी पशोपेश में पड़े हुए हैं। कड़ी मशक्कत करने के बाद छात्र बीयू के फार्मेसी विभाग में दाखिला ले पाए थे। पर अब उनकी मेहनत बेकार होती नजर आ रही है। जिस उम्मीद से उन्होंने प्रवेश लिया था वह सार्थक नहीं हो रहा हैं। मौजूदा स्थिति में विभाग में महज एक प्रोफेसर कार्यरत है। प्रोफेसरों के अभाव में कक्षाएं सफर कर रही हैं। इससे निपटने के लिए विभाग ने पीजी छात्रों से स्नातक छात्रों की अध्ययन में मदद करने को कहा था, जिसके लिए वह तैयार हो गए। स्नातक छात्रों की अध्ययन व्यवस्था विवि ने कर दी, पर पीजी छात्रों के लिए विभाग कोई विकल्प नहीं खोज पाया है। विभाग के स्नातक पाठ्यक्रम में 240 व पीजी में पचास छात्र अध्ययनरत हैं। विवि की कार्यपरिषद की बैठक पिछले महीने हुई, जिसमें फार्मेसी प्रोफेसरों की संविदा नियुक्ति और वेतन को 25 हजार रुपए तक करने पर मंजूरी होना थी। पर बैठक में सिर्फ वेतन को बढ़ाकर 24 हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया है। वहीं नियुक्ति को लेकर कोई उचित निर्णय नहीं हो सका है।
पैसा भरपूर, सुविधा कुछ नहीं : 
फार्मेसी विभाग में स्नातक छात्रों प्रति सेमेस्टर 41 तथा पीजी छात्र 50 हजार रुपए फीस देते हैं। विवि ने उन्हें सुविधा के नाम पर कोरी लैब और प्रोफेसरों से नदारद विभाग दिया है। विभाग में पांच प्रोफेसरों को संविदा पर नियुक्त किया गया था, जिनका कार्यकाल पिछले महीने समाप्त हो चुका है। इनका मासिक वेतन 12 हजार रुपए प्रति माह था। छात्रों का कहना है कि विवि को काबिल प्रोफेसरों का चयन करना चाहिए। ताकि उनकी जिज्ञासा का अंत हो सके(दैनिक जागरण,भोपाल,17.4.11)।

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