उत्तराखंड के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा है कि लोक भाषाओं के संरक्षण के लिए दून विविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय भाषा संस्थान की स्थापना की जाएगी। उन्होंने यह घोषणा उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा ओएनजीसी के एएमएन घोष सभागार में आयोजित लोक भाषा सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर कही। इस दौरान राज्य के वरिष्ठ साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। साहित्यकारों ने भाषा संस्थान की शोध पत्रिका 'उद्गाता' का विमोचन भी किया। डा. निशंक ने दून विविद्यालय के कुलपति डा. गिरिजेश पंत को अंतरराष्ट्रीय भाषा संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने संस्कृत विविद्यालय में अनुवाद प्रकोष्ठ की स्थापना करने का ऐलान भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर ठोस प्रयास किये जाने की आवश्यकता है। भाषा संस्थान की निदेशक डा. सविता मोहन ने कहा कि भाषा संस्थान राज्य के साहित्यकारों के सम्मान और लुप्त होती पांडुलिपियों के प्रकाशन के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान द्वारा उत्तराखंड के जाने-माने साहित्यकारों के नाम पर सम्मान प्रारम्भ किए जा रहे हैं। इन पुरस्कारों के लिए विज्ञापन के माध्यम से नाम आमंत्रित किए गए। 68 नामांकनों में सम्मान चयन समिति ने 22 लोगों को चुना है। इसके साथ सम्पूर्ण जीवन में अप्रतिम योगदान के लिए दो साहित्यकारों को महत्तर सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम में डा. देवी दत्त शर्मा एवं डा. हरिदत्त भट्ट 'शैलेश' को महत्तर सम्मान दिया गया। गुमानी पंत सम्मान से शिवराज सिंह रावत 'निसंग' एवं शेर सिंह पांगती को सम्मानित किया गया(राष्ट्रीय सहारा,देहरादून,17.4.11)।
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