सोशल साइंस कोर्सेज में सेमेस्टर सिस्टम को लागू करना टेढ़ी खीर बनता जा रहा है। सोशल साइंस फैकल्टी ने डीयू प्रशासन से साफ कह दिया है कि वह ब्लूप्रिंट दे, तभी सेमेस्टर सिस्टम के तहत कोर्स तैयार हो सकेंगे। फैकल्टी ने रजिस्ट्रार द्वारा शैक्षणिक मामले में आदेश जारी करने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार कुलपति प्रो. दिनेश सिंह ने फैकल्टी को साफ कहा है कि वह विभागों की कोर्स कमेटी की बैठक करवाकर कोर्स तैयार करवाएं। गौरतलब है कि सोशल साइंस फैकल्टी के पास केवल सोशल वर्क का कोर्स ही तैयार होकर आया था लेकिन इसे देखे बिना ही सदस्यों ने इसे पास करने से इनकार कर दिया। वहीं सोशल साइंस फै कल्टी से जुड़े अन्य विषयों मसलन अर्थशास्त्र, भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास और राजनीति शास्त्र का कोर्स भी इनके विभागों ने तैयार नहीं किया। इकोनॉमिक्स ऑनर्स के मामले में तो विभाग ने फैकल्टी को जानकारी दी कि 22 कॉलेजों ने इस कोर्स में सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने से साफ इनकार कर दिया है। इन सभी स्थितियों को ध्यान में रखने हुए फैकल्टी ने कुलपति को पत्र लिखा है। पत्र में रजिस्ट्रार द्वारा उस आदेश का विरोध किया गया है, जिसमें सेमेस्टर सिस्टम का विरोध करने वालों के नाम बताने को कहा गया है। फैकल्टी का कहना है कि डीयू के शैक्षणिक मामलों में कुलपति या फिर समकुलपति द्वारा ही आदेश जारी किया जाना चाहिए। विभाग फैकल्टी को रिपोर्ट करता है, न कि रजिस्ट्रार को। फैकल्टी ने कुलपति से यह भी कहा है कि फैकल्टी और विभागों ने पहले भी सेमेस्टर सिस्टम को लेकर चिंता जताई थी लेकिन विश्वविद्यालय की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला था। वर्ष 2009 में विद्वत परिषद की बैठक में भूगोल, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र विभागाध्यक्षों ने सेमेस्टर सिस्टम का विरोध किया था लेकिन इसको रिकॉर्ड नहीं किया गया। अब रजिस्ट्रार द्वारा यह भी कहा जा रहा है कि सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने में देर हो रही है(राकेश नाथ,राष्ट्रीय सहारा,दिल्ली,18.4.11)।
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