सरकारी स्कूलों के बच्चे भी अब फर्राटे से अंग्रेजी बोल सकेंगे। इस साल से सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू किया जा रहा है। साथ ही सीबीएसई स्कूलों की अधोसंरचना व उनमें होने वाली पढ़ाई के स्तर का मुकाबला करने के लिए जिले के दस सरकारी स्कूलों को तैयार किया जाएगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से शासकीय स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने व उनमें बच्चों को आकर्षित करने के लिए संभागीय शिक्षा कार्यालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अंतर्गत जिले के दस शासकीय स्कूलों का चयन किया जाएगा। इन स्कूलों की अधोसंरचना प्रायवेट स्कूलों की तर्ज पर खड़ी की जाएगी। साथ ही सभी स्कूलों का रंग-रोगन कर व्यवस्थित व सुंदर बनाया जाएगा। इन स्कूलों में कक्षा छठवीं से अंग्रेजी माध्यम का कोर्स शुरू किया जाएगा। अंग्रेजी माध्यम पढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी होने पर उनकी गेस्ट फेकल्टी भर्ती की जाएगी। इन शिक्षकों को वेतन भी आकर्षक देने की योजना है। उक्त प्रस्ताव ने इस साल मूर्त रूप लिया, तो आगामी हर वर्ष दस से पंद्रह स्कूलों का चयन कर सभी शासकीय स्कूलों में लागू किया जाएगा।
इसलिए लिया गया निर्णय :
सरकारी स्कूल के बच्चे अंग्रेजी माध्यम में काफी कमजोर होते हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद प्रायवेट शिक्षण संस्थाओं में न्यूनतम पच्चीस फीसदी सीटों पर गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाना है। शासकीय स्कूलों में भी वर्तमान में अधिकांश गरीब बच्चे प्रवेश लेते हैं। यह बच्चे ही प्रायवेट स्कूलों की तरफ रूख करेंगे। इससे सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या पर आगामी समय में बहुत ही कम होने के आसार है। इसे देखते हुए सरकारी स्कूलों को प्रायवेट के मुकाबले खड़ा किया जा रहा है। ताकि प्रतियोगिता के दौर में बच्चे सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का मुकाबला कर सकें।
नींव मजबूत करने होगा ब्रिज कोर्स :
पांचवी के बाद कक्षा छठवीं में अंग्रेजी माध्यम से प्रवेश लेने पर छात्रों को अंग्रेजी में परेशानी होने पर उनको पहले ब्रिज कोर्स कराया जाएगा। इसमें छात्रों को अंग्रेजी माध्यम से कक्षा के अनुरूप दक्ष करने का प्रस्ताव बनाया गया है(दैनिक जागरण,भोपाल,18.4.11)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।