डीयू में बीकॉम ऑनर्स और बीकॉम कोर्सेज में एडमिशन के लिए सबसे ज्यादा मारामारी देखने को मिलती है। लेकिन इनमें मैथ्स फैक्टर सबसे अहम रहता है। बीकॉम ऑनर्स में ज्यादातर कॉलेज उन स्टूडेंट्स को ही एडमिशन देते हैं , जिन्होंने 12 वीं में मैथ्स पढ़ा है। इसके अलावा बीकॉम में मैथ्स नहीं पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को भी एडमिशन मिल जाता है। कॉलेज कट ऑफ की अलग - अलग कैटिगरी बना देते हैं। मसलन मैथ्स में हाई स्कोर करने वालों को खास छूट मिलती है। इन सब मसलों पर डीयू गंभीरता से विचार कर रहा है और संभावना है कि कॉमर्स कोर्सेज में मैथ्स को लेकर भी कुछ नियम जारी किए जाएं।
सूत्रों के मुताबिक , डीयू एक प्रस्ताव पर विचार कर रहा है , जिसमें कहा गया है कि बीकॉम ऑनर्स में एडमिशन के लिए स्टूडेंट्स का 12 वीं में मैथ्स पढ़ा होना जरूरी हो , जबकि बीकॉम के लिए 10 वीं तक मैथ्स पढ़े होने की शर्त हो। हालांकि , यह प्रपोजल फाइनल होता है या नहीं , इस बारे में अभी फैसला नहीं हुआ है। लेकिन यूनिवर्सिटी यह जरूर चाहती है कि हर कॉलेज में एडमिशन की शर्तों में बहुत ज्यादा फर्क न हो।
यूनिवर्सिटी ने सभी कॉलेजों को लिखा है कि अलग - अलग कोर्सेज में एडमिशन के लिए क्या - क्या शर्तें हैं , इसकी जानकारी यूनिवर्सिटी को दी जाए , ताकि वेबसाइट पर इसे जारी किया जा सके। साथ ही अगर यूनिवर्सिटी को किसी शर्त पर आपत्ति है तो उसे एडमिशन प्रोसेस शुरू होने से पहले ही कॉलेज को बताया जा सके। डीन स्टूडेंट वेलफेयर ऑफिस की ओर से कॉलेजों से यह जानकारी मांगी गई है। यूनिवर्सिटी के इन्फर्मेशन बुलेटिन में भी कॉलेज का एडमिशन क्राइटेरिया होगा , ताकि स्टूडेंट्स पहले से ही यह जान सकें कि कौन सा कॉलेज किन शर्तों के तहत एडमिशन दे रहा है। जब कट ऑफ जारी हो तो स्टूडेंट्स को यह पता हो कि किस कॉलेज में उसका नंबर आ रहा है।
कॉलेजों के अलग - अलग एडमिशन फॉर्म्युले होते हैं और इससे स्टूडेंट्स को खासी परेशानी होती है। सबसे अधिक समस्या वोकेशनल सब्जेक्ट को लेकर है। यूनिवर्सिटी जिन सब्जेक्ट को ऐकडेमिक मानती है , उन सब्जेक्ट को कॉलेजों में वोकेशनल कहा जाता है और स्टूडेंट्स को एडमिशन में परेशानी होती है। सूत्र बताते हैं कि एडमिशन पॉलिसी में वोकेशनल सब्जेक्ट को लेकर भी कुछ गाइड लाइंस होंगी(नवभारत टाइम्स,दिल्ली,18.4.11)।
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