देशभर की सेकंडरी व सीनियर सेकंडरी स्कूलों की पहचान अब स्कूल एजुकेशन मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (सेमिस कोड) के जरिये होगी। सभी स्कूलों को सेमिस कोड नंबर आवंटित कर दिए गए हैं। अब स्कूलों के दस्तावेजों पर भी ये सेमिस कोड अंकित करना जरूरी होगा।
सभी स्कूलों को एक नेटवर्क से जोड़ देने से अब देश के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी स्कूल की सारी जानकारी हासिल की जा सकेगी। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन ने सभी स्कूलों को एक नेटवर्क पर जोड़ने का खाका तैयार किया है। स्कूलों के बनाए जाने वाले फर्जी दस्तावेजों पर अंकुश लगाने के लिए अब स्कूल की अधिकारिक मुद्रा (रबड़ स्टांप) में भी सेमिस कोड अंकित करना होगा। सभी स्कूल एक नेटवर्क पर आ जाने से स्कूल प्रशासन भी सरकार की ओर से समय-समय पर जारी की जाने वाली गाइड लाइन के बारे में भी जानकारी हासिल कर सकेगा।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान माध्यमिक स्तर की शिक्षा की गुणात्मक एवं संख्यात्मक वृद्धि के लिए कार्य कर रहा है। अभियान के तहत जिले की प्रत्येक माध्यमिक व सीनियर सेकंडरी स्कूलों को प्रति वर्ष डाटा कैप्चर फार्मेट भरना होगा। इसमें विद्यालय प्रबंधन, भवन, नामांकन, परीक्षा परिणाम एवं संसाधनों का ब्यौरा देना होगा। इससे केंद्र सरकार को भी हर स्कूल की गतिविधि मालूम पड़ सकेगी।
प्रत्येक विद्यालय को अखिल भारतीय स्तर पर कोड नंबर जारी कर दिए हैं। चरित्र प्रमाण-पत्र व टीसी समेत अन्य कागजातों में सेमिस कोड अंकित नहीं होने की सूरत में उसे फर्जी समझा जाएगा। स्कूल के रबड़ स्टांप में भी विद्यालय का कोड अंकित करना होगा। - एके गुप्ता, अति. परियोजना समन्वयक
सेमिस कोड नहीं हुआ तो प्रमाण-पत्र फर्जी: स्कूलों की ओर से जारी किए जाने वाले स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टी.सी.), चरित्र प्रमाण-पत्र व अंक तालिका पर अगर अखिल भारतीय स्तर पर आवंटित किया गया सेमिस कोड अंकित नहीं होगा तो उस प्रमाण-पत्र की कोई वैधता नहीं होगी। उसे फर्जी माना जाएगा(दैनिक भास्कर,अजमेर,18.4.11)।
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