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30 जुलाई 2011

नागपुर के नर्सिंग कॉलेज ने घंटे भर में ही भर दिए 50 पद

जो काम पिछले 10 वर्षो में नहीं हुआ, वह महज एक घंटे में हो गया। इस छोटे से समय में 50 से अधिक पदों को भर दिया गया। यह रिकार्ड किसी और ने नहीं शासकीय नर्सिंग कालेज ने बनाया है।

यह पूरी उठापटक किसी भी सूरत में रोकी गई संबद्धता हासिल करने के लिए की गई है। इसी कवायद में और भी मेडिकल कालेजों के संस्था संचालक लगे हुए हैं।

जिन 75 कालेजों को संबद्धता देने से मना किया गया है उनमें सबसे अधिक कालेज विदर्भ के हैं। इनमें अकेले नागपुर स्थित शासकीय मेडिकल साइंस कालेजों की संख्या तीन है।

10 कालेजों ने एक दिन में भरे पद

शासकीय नर्सिग कालेज में कुल पदों के 30 फीसदी ही पद भरे गए थे। कालेज में प्राचार्य, उपप्राचार्य तथा प्रशासनिक अधिकारी समेत ग्रंथपाल आदि के पद रिक्त हैं। इन पदों को राज्य सरकार की मार्फत शीघ्र ही स्थायी रूप से भरने का आश्वासन दिया गया है। ऐसे 10 कालेज हैं, जिन्होंने एक ही दिन में पदों को भर दिया है।

बनाया गया था राजनीतिक दबाव


रिक्त पदों को भरने तथा कालेज संचालन करने के लिए मापदंडों को पूरा करने की कवायद अचानक शुरू होने के पीछे मुख्य कारण है कि सभी कालेजों को शैक्षणिक सत्र 2011-12 में संबद्धता देने से महाराष्ट्र राज्य स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय नाशिक ने मना कर दिया है। 
हालांकि विवि की विद्वत परिषद की बैठक में यह फैसला गत 30 मई और उसके बाद 7 जून को ले लिया गया था, किंतु राजनीतिक दबाव के कारण फैसला तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हो पाया।

समिति की रिपोर्ट के बाद होगा फैसला

सूत्रों की मानें तो राज्यपाल व विवि के कुलाधिपति के. शंकरनारायण के समर्थन के कारण राज्य सरकार ने दखलंदाजी करने से मना कर दिया था। गुरुवार को कालेजों की सूची जारी होने के बाद शुक्रवार को सबसे पहले शासकीय नर्सिंग कालेज नागपुर ने पदों को भरा। 

साथ ही इसकी सूचना विवि प्रशासन को भेजकर संबद्धता प्रदान करने के लिए कहा। विवि ने तुरंत रोक हटाने से मना कर दिया है। कालेज प्रशासन को कहा गया है कि विवि की एक जांच समिति कालेज का दौरा करेगी, फिर समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही फैसला लिया जाएगा(दैनिक भास्कर,नागपुर,30.7.11)।

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