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19 अगस्त 2011

डिजाइनिंग में करिअर

पहनावे से लेकर रोजाना जिंदगी में प्रयोग होने वाली हर चीज को डिजाइनर बनाने की होड़ लगी हुई है। यही वजह है कि डिजाइनरों की मांग तेजी से बढ़ रही है, फिर चाहे वह फैशन डिजाइनर हो, टूल डिजाइनर हो, बिल्डिंग डिजाइनर हो या फिर एनिमेशन डिजाइनर। यदि आपकी उंगलियों में स्केच का हुनर है और है प्रयोग करने की क्षमता तो आप भी बन सकते हैं डिजाइनर। 

डिजाइनिंग एक ऐसा क्षेत्र है, जो हर रोज एक्सपेरिमेंट करने की प्रेरणा देता है। आज हम जो चीज उपयोग करते हैं, अगले ही दिन उसका नया रूप और बेहतर सुविधाओं के साथ बाजार में दिखाई देने लगता है। जो लोग इन चीजों को बदलने की रूपरेखा तैयार करते हैं, उन्हें डिजाइनर कहते हैं और उनके द्वारा किए गए काम को क्रिएटिव डिजाइनिंग। क्रिएटिव डिजाइनिंग का क्षेत्र बहुत विस्तृत है और यह चित्रकला तथा कल्पनाशीलता का परिणाम है। इसमें हमारी दैनिक आवश्यकताओं के अनुसार अनेक उपयोगी वस्तुओं का खाका यानी डिजाइन तैयार कर उन्हें निर्मित किया जाता है। आज हमारे दैनिक जीवन में जितनी भी उपयोगी वस्तुएं, मनोरंजन या ज्ञान के साधन हैं, क्रिएटिव डिजाइनिंग की भी उतनी ही शाखाएं हैं। इस तरह डिजाइनिंग कई हिस्सों में बंट चुका एक ऐसा क्षेत्र है, जिसकी जरूरत दिनोदिन बढ़ती जा रही है। आप अपनी सुविधा और रुचि के अनुसार डिजाइनिंग की किसी भी शाखा को अपना करियर बना सकते हैं।
फैशन डिजाइनिंग
फैशन डिजाइनिंग व्यावहारिक कला का ही एक पहलू है, जो कपड़ों, एक्सेसरीज और जीवनशैली में निखार लाने के लिए कार्य करती है। फैशन डिजाइनिंग में करियर के अच्छे अवसर हैं। एक सफल फैशन डिजाइनर डिजाइन वियर प्रोडक्शन, फैशन को-ऑर्डिनेटर, क्वालिटी कंट्रोल, कॉस्टयूम डिजाइनर, फैशन मार्केटिंग, पर्सनल स्टाइलिस्ट, फैब्रिक बायर के क्षेत्र में करियर बना सकता है। फैशन डिजाइनिंग का कोर्स करने के लिए क्रिएटिव माइंड के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। कुछ विश्वविद्यालय, कॉलेज और इंस्टीटय़ूट फैशन डिजाइनिंग में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री कोर्सेज कराते हैं, जिनमें प्रवेश के लिए बारहवीं में अच्छी परसेंटेज के अलावा प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है।
फुटवियर डिजाइनिंग

फुटवियर डिजाइनिंग में क्रिएटिव होना बहुत जरूरी है। फुटवियर इंडस्ट्री में डिजाइनिंग, मैन्युफेक्चरिंग और मार्केटिंग स्तर पर काम किया जाता है। इस क्षेत्र में कंप्यूटर की जानकारी जरूरी है। इस कोर्स में भी बारहवीं के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। इस क्षेत्र में डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स के अलावा ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स भी करवाए जाते हैं। ये कोर्स एक साल से लेकर तीन साल तक के होते हैं। अधिकतर एडमिशन प्रवेश परीक्षा पास करने के बाद होते हैं।
टूल डिजाइनिंग
टूल डिजाइनिंग में मोल्ड्स और प्लास्टिक की उपयोगी चीजों के डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इस क्षेत्र में टेक्नीशियन बनने के बाद आसानी से टूल डिजाइनर बना जा सकता है। टूल डिजाइन स्वरोजगार के रूप में अच्छा क्षेत्र है। इस क्षेत्र में काम करने के लिए पॉलिटेक्नीक कोर्स/डिप्लोमा कोर्स किया जा सकता है। पॉलिटेक्नीक कोर्स के लिए गणित और विज्ञान विषयों के साथ 60 प्रतिशत तथा एससी/एसटी के लिए 50 प्रतिशत अंकों के साथ दसवीं पास होना अनिवार्य है, जबकि सर्टिफिकेट कोर्स के लिए दसवीं में गणित और विज्ञान विषयों के साथ एससी/एसटी के लिए 40 प्रतिशत तथा अन्य के लिए 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। 
ज्वेलरी डिजाइनिंग 
ज्वेलरी डिजाइनिंग जबसे परम्परागत व्यवसाय से उठ कर कोर्स में शामिल हुई है, तब से इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। इस क्षेत्र में अब सुनारों के अलावा डिप्लोमा/डिग्रीधारी प्रोफेशनल्स काम कर रहे हैं। आजकल सोने-चांदी के अलावा अन्य धातुओं का भी आभूषणों में प्रयोग किया जा रहा है, इसलिए इस क्षेत्र में आने वाले युवाओं को सभी धातुओं, नगों और रत्नों और हाथी दांत की शुद्घता की परख सिखाई जाती है। इस क्षेत्र में ज्वेलरी डिजाइन, इनेमलिंग, स्टोन कटिंग, कास्टिंग टेक्नोलॉजी, जेमोलॉजी, आईडेंटीफिकेशन ऑफ स्टोन एंड जेम्स, रत्नों का चुनाव, मूल्य, काटना और तराशना, पियर्स कास्टिंग, सेटिंग, पॉलिशिंग, सोइंग तथा सोल्डरिंग जैसे प्रशिक्षण दिए जाते हैं।
एक्सेसरीज डिजाइनिंग
एक्सेसरीज डिजाइनिंग में ज्वेलरी के अलावा, घड़ियां, बेल्ट्स, बैंगल्स, ब्रेसलेट, कड़े आदि डिजाइन किए जाते हैं। यह ज्वेलरी डिजाइनिंग का ही एक रूप है, मगर इसके अलग से स्पेशल कोर्स भी कराए जाते हैं, जिसके लिए दसवीं से बारहवीं पास होना जरूरी है।
बिल्डिंग डिजाइनिंग
बिल्डिंग डिजाइनिंग को आर्किटेक्चर डिजाइनिंग अथवा इंजीनियरिंग भी कहते हैं। इस क्षेत्र में मकानों, दुकानों और मॉल्स के नक्शे बनाना और सीनियर लेवल पर बने हुए नक्शे पास करना और निर्मित बिल्डिंग का सर्वेक्षण उनकी सुरक्षा और सुंदरता को ध्यान में रख कर किया जाता है। इस क्षेत्र में सरकारी और प्राइवेट, दोनों सेक्टर्स में अपार संभावनाएं है।
फर्नीचर डिजाइनिंग
फर्नीचर डिजाइनिंग में कंप्यूटर नॉलेज के साथ लकड़ी की पहचान, उसे काटने, छीलने और शेप में ढालने का तजुर्बा भी होना चाहिए। एक फर्नीचर डिजाइनर को मार्केट की चेंजिंग, डिमांड, कलात्मक सोच और तीखी नजर वाला होना चाहिए। इस क्षेत्र में डिप्लोमा और सर्टिफिकेट, दोनों कोर्स किए जा सकते हैं। इसके लिए कुछ कोर्स दसवीं और कुछ बारहवीं के बाद किए जा सकते हैं।
इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग
इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में ऑफिस एक्सेसरीज, इलेक्ट्रिक खिलौने, टेलीफोन, मोबाइल, टीवी, टेप रिकॉर्डर, रेडियो, कंप्यूटर, बैग, पर्स, डब्बों आदि को डिजाइन किया जाता है। इस क्षेत्र में विज्ञान के विद्यार्थियों को प्राथमिकता मिलती है। कोई भी अभ्यर्थी बारहवीं के बाद इंडस्ट्रियल डिजाइनर बन सकता है। इस क्षेत्र में सर्टिफिकेट, डिप्लोमा व डिग्री कोर्स उपलब्ध हैं।
टेक्सटाइल डिजाइनिंग
टेक्सटाइल डिजाइनिंग में सिल्क, खादी, जूट व हैंडलूम का काम किया जाता है। दरअसल यह फैशन डिजाइनिंग से ही संबंधित फील्ड है। फैशन के बूम में टेक्सटाइल डिजाइनरों के लिए काफी अवसर हैं। इस क्षेत्र में गारमेंट मैन्यूफेक्चरिंग इंडस्ट्रीज, रिटेलिंग बिजनेस और एक्सपोर्ट हाउसेज में मौके मिलते हैं। टीचिंग लाइन में एक टेक्सटाइल डिजाइनर को अच्छे अवसर मिलते हैं।
डिजाइनर बनने से पहले इन बातों पर रखें ध्यान
डिजाइनिंग का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। अत: विषय चुनने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आप डिजाइनिंग के किस क्षेत्र में रुचि रखते हैं। साथ ही आप उस क्षेत्र में कितना बेहतर कर सकते हैं।
अधिकतर डिजाइनिंग के कोर्सेज में प्रवेश लेने के लिए विज्ञान और गणित विषयों की डिमांड रहती है, लेकिन ध्यान रखने की बात यह है कि आपको आर्ट का ज्ञान होना चाहिए।
नई तकनीकी सोच और कल्पनाशीलता, तार्किक बुद्घि तथा कुछ नया करने की चाहत ही एक डिजाइनर को करियर की ऊंचाई तक पहुंचा सकती है। अत: एक डिजाइनर को इन सब खूबियों वाला होना चाहिए।
डिजाइनिंग में प्रैक्टिकल का बहुत महत्त्व है। एक डिजाइनर को लगातार नए प्रयोगों और प्रेक्टिस तथा अध्ययन करते रहना चाहिए।
एक डिजाइनर को आज की प्रतियोगिता के साथ चीजों की बिक्री के आंकड़ों और ग्राहकों की मांग व जरूरत पर हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
नए जमाने के डिजाइनिंग के प्रमुख क्षेत्र
एनिमेशन डिजाइनिंग
एनिमेशन डिजाइनिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत और ग्राफिक/वेब डिजाइनिंग से कुछ हट कर है, मगर एनिमेशन डिजाइनिंग ग्राफिक डिजाइनिंग या कार्टूनिस्ट का ही विस्तृत रूप है। एनिमेशन डिजाइनरों के लिए एनिमेटिड फिल्मों, जनरल/ओवरएक्टिंग वाली फिल्मों, विज्ञापन कंपनियों में काफी मौके हैं। भारत में इसकी अपार संभावनाएं देखी जा रही हैं। इस क्षेत्र में काम करने वालों को कमर्शियल आर्ट, फाइन आर्ट, अप्लाइड आर्ट, ग्राफिक डिजाइन, विजुअल कम्युनिकेशन डिजाइन, एनिमेशन डिजाइन आदि का ज्ञान होना चाहिए। 
वेब डिजाइनिंग
वेब डिजाइनिंग सिर्फ कंप्यूटर पर की जाती है। इस क्षेत्र में काम करने वालों को वेबसाइट, पोर्टल, कार्टून, लोगो, ग्राफिक आदि बनाने का हुनर सीखना पड़ता है। एक वेब डिजाइनर को पत्र-पत्रिकाओं, एड कंपनियों, वेबसाइट डिजाइन करने-कराने वाली कंपनियों और कंप्यूटर गेमिंग के क्षेत्र में मौके मिल सकते हैं।
ग्राफिक डिजाइनिंग
ग्राफिक डिजाइनिंग में मूल रूप से विजुअल से संबंधित समस्याओं को हल करना होता है। ग्राफिक डिजाइनिंग में कला और विज्ञान, दोनों के ज्ञान की जरूरत पड़ती है। इसमें टेक्स्ट और ग्राफिकल एलिमेंट का प्रयोग किया जाता है। एक ग्रफिक डिजाइनर का मुख्य काम पेज एवं अन्य प्रोग्राम को आकर्षक और सुंदर बनाने का होता है। 
लोगो डिजाइनिंग
किसी कंपनी, विज्ञापन या किताब का लोगो बनाना अपने आप में एक कला है। वैसे तो यह कार्टून डिजाइनिंग की ही शाखा है, लेकिन लोगो डिजाइनर्स को कार्टून डिजाइनर्स से अलग काम करना पड़ता है।
इंटीरियर डिजाइनिंग
इंटीरियर डिजाइनिंग भी बिल्डिंग डिजाइनिंग से जुड़ी हुई एक अलग शाखा है। इस क्षेत्र में मकान, दुकान, मॉल्स और दफ्तर को सजाने का काम किया जाता है। आज बिल्डिंग डिजाइनरों की जितनी आवश्यकता है, उतनी ही इंटीरियर डिजाइनरों की भी मांग है। कहीं-कहीं बिल्डिंग डिजाइनरों को ही इंटीरियर डिजाइनिंग का काम सिखाया जाता है। वैसे भी एक बिल्डिंग डिजाइनर को इंटीरियर डिजाइनिंग की नॉलेज होना बहुत जरूरी है।
फैक्ट फाइल
संस्थान 
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
वेबसाइड - www.nift.ac.in
फुटवियर डिजाइनिंग एंड डेवलपमेंट इंस्टिटय़ूट, नोएडा 
वेबसाइट- www.fddiindia.com
भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान, झंडेवालान, नई दिल्ली
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.spa.ac.in
नेशनल इंस्टिटय़ूट ऑफ डिजाइन, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.nid.edu
नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद
वेबसाइट- www.nid.edu
आईआईटी, मुंबई, इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, पवई, मुंबई
वेबसाइट- www.iitb.ac.in
जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली
वेबसाइट- www.jmi.ac.in
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
संभावनाएं
हर रोज रूप बदलती चीजों के इस दौर में मार्केट और लोगों की हर सुबह एक नई मांग होती है। बाजारवाद बढ़ने के साथ प्रतियोगिता के चलते हर उपयोगी चीज के नए-नए डिजाइन प्रतिदिन बाजार में उतारे जा रहे हैं। 
बड़ी-बड़ी कंपनियां इसमें और इजाफा कर रही हैं। ऐसे में प्रशिक्षित एजुकेटेड डिजाइनर्स की काफी मांग हो रही है। इसके लिए पूरा विश्व चीन और भारत की ओर नजरें किए हुए है, क्योंकि यहां अच्छे और सस्ते डिजाइनर उपलब्ध हैं। ग्राफिक डिजाइनर हेमंत स्नेही बताते हैं कि हालांकि डिजाइनिंग के क्षेत्र में युवाओं की काफी भीड़ बढ़ रही है, लेकिन बावजूद इसके आज डिजाइनरों की काफी मांग है। आज बाजार में अनेक छोटी-बड़ी कंपनियां, पत्र-पत्रिकाएं और विज्ञापन कंपनियां हैं, जो डिजाइनरों के ज्ञान के हिसाब से भर्ती करने में बराबर जुटी हैं।
वेतन
डिजाइनिंग का क्षेत्र काफी विस्तृत है, इसीलिए इस क्षेत्र में योग्यता और ज्ञान और कंपनियों के विस्तार और क्षेत्र के साथ-साथ अलग-अलग पैकेज पर डिजाइनरों को नौकरी पर रखा जाता है। फिर भी मोटे तौर पर डिजाइनिंग के कुछ क्षेत्र में शुरुआत में 6 हजार से 10 हजार तथा कुछ क्षेत्र में 8 हजार से 50 हजार तक वेतन मिल जाता है। दो-तीन साल के एक्सपीरियंस के बाद 15 हजार से एक से दो लाख रुपए प्रतिमाह मिल जाते हैं। एक डिजाइनर जब अपना काम करता है तो कमाई की कोई लिमिट नहीं रहती। जैसे-जैसे काम बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे कमाई बढ़ती जाती है। 
लोन 
डिजाइनिंग का कोर्स करने के बाद यदि आप अपना बिजनेस स्थापित करते हैं तो किसी भी स्थानीय बैंक से लोन के लिए संपर्क कर सकते हैं। आप प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लोन ले सकते हैं। बशर्ते उस क्षेत्र के लिए लोन उपलब्ध हो। इसके अलावा कुछ सरकारी संस्थान ट्रेनिंग कराने के उपरांत जारी किए गए सर्टिफिकेट पर स्वरोजगार के लिए लोन उपलब्ध कराते हैं। इच्छुक अभ्यर्थी उन संस्थानों के माध्यम से नजदीकी बैंक से लोन ले सकते हैं, जिनसे उन्होंने कोर्स किया है। वे किसी संस्थान में प्रवेश लेने के बाद या प्रवेश की स्वीकृति मिलने पर भी न ले सकते हैं(प्रेम बरेलवी,हिंदुस्तान,दिल्ली,17.8.11)।

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