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01 जून 2012

छत्तीसगढ़ः परीक्षा लेने से डरता है आयोग

राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में लगातार विवाद से प्रदेश में जरूरत के मुताबिक अधिकारियों की भर्ती नहीं हो पा रही है। इसका सीधा असर प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ रहा है। पिछले चार साल तक लगातार परीक्षा न होने से राज्य में विभिन्न श्रेणी के अधिकारियों के लगभग डेढ़ हजार पद खाली पड़े हैं। शासन ने पीएससी से और अधिकारियों की भर्ती करने के लिए रिक्विजिशन दिया है लेकिन 2012 में भी पीएससी का कैलेंडर बनता नहीं दिख रहा है। 

पीएससी ने राज्य बनने के 11 सालों में अब तक चार बार सिविल सेवा परीक्षाओं का आयोजन किया है जबकि अब तक 11 परीक्षाओं का आयोजन किया जाना चाहिए था। हर बार परीक्षा में धांधली, स्केलिंग पद्धति की गड़बड़ी, गलत प्रश्नों की भरमार आदि के चलते मामला सालों तक उलझता रहा। पीएससी की गलती से प्रदेश में अफसरों के खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। जनवरी में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर शासन ने विभिन्न विभागों में खाली पदों की जानकारी एकत्र की थी। इन पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही थी लेकिन अब अजा वर्ग के आरक्षण में कटौती का मामला हाईकोर्ट में है लिहाजा नई भर्तियों की संभावना फिलहाल नहीं बची है। 

पीएससी ने चार साल बाद 2008 की मेन्स की परीक्षा इस साल मार्च में ली है। अभी इस परीक्षा की आपत्तियों का निराकरण किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस सप्ताह मेन्स का रिजल्ट घोषित कर दिया जाएगा। इस बीच 2011 की प्रारंभिक परीक्षा भी लगभग एक साल देर से इसी महीने ली गई। इस परीक्षा में भी आपत्तियों की भरमार है। 

पीएससी ने इन दोनों परीक्षाओं में इतनी गलतियां की हैं कि मामला कोर्ट में जाना तय माना जा रहा है। यानि प्रदेश में नए अधिकारियों की भर्ती जल्द होने के आसार कम ही हैं। अधिकारियों की कमी से प्रशासन में आ रही दिक्कत को देखते हुए इसी साल पीएससी 2012 का आयोजन किया जाना था। सीएम के निर्देश पर शासन ने अपनी मांग से भी पीएससी को अवगत कराया था। लेकिन आरक्षण के विवाद के कारण अब यह संभव नहीं है। 

प्रशासन में खाली पदों की भरमार 
वर्तमान में प्रदेश में अधिकारियों के लगभग डेढ़ हजार पद खाली हैं। आरटीआई के तहत विभिन्न विभागों से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर के 106, डीएसपी के 103, आरटीओ के 57, सहायक जेल अधीक्षक के 27, वाणिज्य कर अधिकारी के 73, आबकारी अधिकारी के 40, खाद्य अधिकारी के 13, महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी के 100, नायब तहसीलदार के 300, सहायक अधीक्षक भू अभिलेख के 50 और सहकारिता निरीक्षक के 75 पद खाली हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग, वन विभाग और दूसरे विभागों में भी अधिकारियों के पद बड़ी संख्या में खाली हैं(दैनिक भास्कर,रायपुर,1.6.12)।

1 टिप्पणी:

  1. It is true that University doesn't confer doctor degree/diploma to physician and surgeon(except PhD.degree on any medical subject). It simply confer degree/diploma in the concerned medical branch.And on the basis of these degree/diploma the candidate received the right to write his/her name as doctor.Doctor means doctorate degree conferred by university and doctor means physician /surgeon in any branch or system of medicine also.Thanking you.
    Dr. V.L.Gupta

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